फ्रांस के नए प्रधानमंत्री सेबास्टियन लेकोर्नू ने रविवार को अपनी नई सरकार की घोषणा की, जिसमें कुछ पुराने चेहरों की वापसी और कुछ नए नियुक्तियां देखने को मिलीं। लेकॉर्नू ने पूर्व वित्त मंत्री ब्रूनो ले मेर को रक्षा मंत्रालय का कार्यभार सौंपा है। उन्हें यूक्रेन को सैन्य समर्थन देने और रूस से यूरोप को हो रहे सुरक्षा खतरों का सामना करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
संसद में बहुमत न होने से सरकार पर खतरा
नई कैबिनेट की घोषणा राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के दफ्तर से की गई, लेकिन राजनीतिक अस्थिरता अब भी बनी हुई है। लेकॉर्नू की अल्पमत सरकार संसद में स्थायी बहुमत के बिना काम कर रही है, जिससे उसके लंबे समय तक टिके रहने की संभावना कम है।
विपक्षी दलों ने सरकार के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाने की तैयारी शुरू कर दी है। वहीं, मरीन ले पेन की अगुवाई वाली दक्षिणपंथी नेशनल रैली पार्टी ने जल्द चुनाव कराने की मांग दोहराई है।
लेकॉर्नू चौथे प्रधानमंत्री, जिन पर टिकी मैक्रों की उम्मीदें
39 वर्षीय लेकॉर्नू, जो पहले रक्षा मंत्री थे, को मैक्रों ने पिछले महीने प्रधानमंत्री पद पर पदोन्नत किया था। यह पिछले एक साल में फ्रांस के चौथे प्रधानमंत्री हैं। पिछली सरकार को संसद में बजट कटौती के मुद्दे पर झटका लगा था, जिसके बाद उसे हटाना पड़ा। फ्रांस में यह राजनीतिक अस्थिरता न केवल आर्थिक नीतियों को प्रभावित कर रही है, बल्कि अंतरराष्ट्रीय मंच पर मैक्रों की स्थिति को भी कमजोर कर रही है।
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कैबिनेट में पुराने चेहरों की वापसी
नई सरकार में कई प्रमुख मंत्री अपने पदों पर बने हुए हैं। ब्रूनो रिटायो आंतरिक मंत्री के रूप में, जीन-नोएल बैरो विदेश मंत्री के रूप में और जेराल्ड डारमनिन न्याय मंत्री के रूप में अपने दायित्वों का निर्वहन जारी रखेंगे। वहीं, रोलांड लेस्क्योर को नया वित्त मंत्री नियुक्त किया गया है। फ्रांस की अर्थव्यवस्था, जो यूरोपीय संघ की दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है, बढ़ते घाटे और कर्ज के चलते निवेशकों के बीच चिंता का विषय बनी हुई है।
संसद में बजट पर अग्निपरीक्षा
प्रधानमंत्री लेकॉर्नू मंगलवार को संसद को संबोधित करेंगे, जहां वे अगले साल के बजट को लेकर अपनी योजनाओं का खाका पेश करेंगे। उन्होंने घोषणा की है कि वे संविधान के विशेष अधिकारों का उपयोग करके बजट को बिना मतदान के पारित नहीं कराएंगे, बल्कि विपक्ष से समझौते की कोशिश करेंगे।
इस बीच, फ्रांस में तीन दिनों से राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन जारी हैं। कई यूनियनों और संगठनों ने सार्वजनिक सेवाओं में कटौती के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया है। गुरुवार को एफिल टॉवर को भी प्रदर्शनकारियों ने बंद करवा दिया था।
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मैक्रों की ‘दांव की राजनीति’ से गहराया संकट
यह संकट पिछले साल तब शुरू हुआ जब मैक्रों ने जून 2024 में राष्ट्रीय विधानसभा (नेशनल असेंबली) को भंग करने का फैसला लिया था। वे उम्मीद कर रहे थे कि नए चुनावों से उनकी प्रो-यूरोपियन सेंट्रिस्ट पार्टी मजबूत होकर लौटेगी, लेकिन परिणाम उल्टा निकला। संसद अब बंटी हुई है और किसी एक दल के पास बहुमत नहीं है।