फ्रांस की मोस्ट वांटेड और आईएसआईएस की महिला आतंकी हयात बुमेदिनेन को 30 साल की जेल की सजा सुनाई गई है। महिला के पति ने साल 2015 में फ्रांस की प्रसिद्ध् पत्रिका शार्ली एब्दो के पेरिस स्थित दफ्तर पर हमला कर पांच लोगों को मार डाला था। हयात के जिहादी पति गुनमान अमेडी कॉलीबेली, उन 14 हमलावरों में से एक है, जिन्होंने शार्ली एब्दो पत्रिका के कार्यालय और एक यहूदी सुपरमार्केट पर हमले किए थे। हयात ने इन हमलों में पति की मदद की थी।
हयात बुमेदिनेन, आईएसआईएस की सदस्य है। माना जा रहा है कि वह अभी सीरिया की जेल में बंद है। फरार महिला आतंकी को फ्रांस में आतंकवाद के मामलों में दोषी पाया गया है। इस मामले की सुनवाई करने वाले जज रेगीस डे जोर्ना ने कहा कि हयात को आतंकवाद के लिए वित्तीय सहायता जैसे मामलों में दोषी पाया गया है।
जज ने कहा कि हयात को 30 साल की सजा सुनाई जाती है। इसका दो तिहाई हिस्सा वह उच्च सुरक्षा वाले कारावास में बिताएगी। सजा सुनाते समय जज ने कहा कि हयात इस बात से इनकार नहीं कर सकती कि उसके बैंक खाते से पैसा निकाला गया और उसके पति और उसके साथियों को आतंकवादी गतिविधियों के लिए दिया गया। हमले के बाद वह फ्रांस से सीरिया भाग गई थी। कोर्ट के आदेश का अर्थ है कि 32 वर्षीय हयात कभी फ्रांस लौटी तो उसे तत्काल जेल में डाल दिया जाएगा।
पैगंबर का कॉर्टून छापने पर किया था हमला
बता दें, वर्ष 2015 में फ्रांस में उक्त आतंकी हमले किए गए थे। इन हमलों में शार्ली एब्दो के कार्यालय पर अंधाधुंध फायरिंग की गई थी, जिसमें 12 लोगों की जान गई थी। पैगंबर मोहम्मद का कार्टून छापने के बाद इस पत्रिका पर हमले को अंजाम दिया गया था। इसके 24 घंटे बाद कॉलीबेली ने फ्रांस के यहूदी समुदाय को अपना निशाना बनाते हुए एक सुपर मार्केट पर हमला किया था।
इस हमले की जिम्मेदारी आतंकी संगठन आईएसआईएस ने ली थी। इसके बाद फ्रांस में आतंकी हमले बढ़े थे। कोर्ट ने माना कि हयात बुमेदिनेन ने अपने पति जिहादी गुनमान अमेडी कॉलीबेली की मदद की थी। कोर्ट ने माना कि पत्नी हयात ने एक फ्रॉड के जरिए अपने पति की वित्तीय मदद की थी, जिससे उसने फ्रांस में हमलों को अंजाम दिया था।