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विदेश नीति से व्यापार नीति तक: मोदी के पीएम बनने के बाद भारत की नीतियों में बड़ा बदलाव, बोले पूर्व US राजदूत

Fri, 24 Apr 2026 08:03 AM IST
Shubham Kumar वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वॉशिंगटन

सार

पूर्व अमेरिकी राजदूत केन जस्टर के अनुसार भारत अब व्यापार और विदेश नीति में ज्यादा खुलापन दिखा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत एशिया व पड़ोसी देशों से संबंध मजबूत कर रहा है, लेकिन RCEP व CPTPP जैसे बड़े समझौतों से अभी दूरी बनाए हुए है।

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केन जस्टर, भारत में पूर्व अमेरिकी राजदूत - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत केन जस्टर ने भारत की बदलती विदेश और व्यापार नीति को लेकर अहम बातें कही हैं। उन्होंने बताया कि हाल के समय में भारत का रुख पहले के मुकाबले ज्यादा खुला और सक्रिय नजर आ रहा है। जस्टर के अनुसार प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पहले दो कार्यकाल की तुलना में अब भारत व्यापार को लेकर ज्यादा खुलापन दिखा रहा है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि भारत अब एशिया के देशों के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है। खासतौर पर पड़ोसी देशों जैसे बांग्लादेश, नेपाल और श्रीलंका के साथ संबंध सुधारने पर ध्यान है।

जस्टर ने आगे इस बात पर भी जोर दिया कि इसके अलावा, भारत ASEAN देशों के साथ भी सहयोग बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है। हालांकि, उन्होंने यह भी साफ किया कि भारत अभी तक किसी बड़े क्षेत्रीय फ्री ट्रेड समझौते में शामिल होने के लिए तैयार नहीं है। भारत पहले ही क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी (RCEP) से बाहर हो चुका है और CPTPP में शामिल होने के संकेत भी नहीं दिए हैं।

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विदेश नीति में नया आत्मविश्वास
पूर्व अमेरिकी राजदूत ने आगे कहा कि साल 2014 में नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद भारत की विदेश नीति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने बताया कि भारत अब दुनिया के कई देशों के साथ ज्यादा आत्मविश्वास के साथ संबंध बना रहा है। विदेश नीति का दायरा पहले से कहीं ज्यादा बढ़ा है। जस्टर ने यह भी कहा कि भारत खुद को एक सभ्यतागत शक्ति के रूप में देख रहा है, जो दुनिया में बड़ी भूमिका निभाना चाहता है।
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समझिए क्या है इस बयान के मायने?
बता दें कि जस्टर का ये बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब भारत और अमेरिका व्यापार समझौते की दिशा में तेजी से बातचीत कर रहा है।  ऐसे में इन बयानों से यह संकेत मिलता है कि भारत अपनी वैश्विक भूमिका को मजबूत करना चाहता है। एशिया और दुनिया के अन्य हिस्सों में अपनी पकड़ बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। लेकिन साथ ही, वह अपने आर्थिक हितों को ध्यान में रखते हुए सावधानी से फैसले ले रहा है।

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