पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान ने बलूचिस्तान के बिगड़ते हालात, विदेश नीति और न्यायपालिका पर पाकिस्तान की शहबाज सरकार को आड़े हाथों लिया है। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ ( पीटीआई ) सुप्रीमो ने कहा, पाकिस्तान की समस्याओं का समाधान केवल वास्तविक तौर से निर्वाचित जनप्रतिनिधि से ही हो सकता है, न कि जबरदस्ती या थोपी गई सरकार के जरिए।
खान ने बलूचिस्तान में बढ़ते आतंकवाद पर गहरी फ्रिक जताते हुए कहा कि चुनावों में धांधली के जरिये लाई गई एक अवैध सरकार वहां के मुद्दों को कैसे हल कर सकती है? उन्होंने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोलियां चलाने और गैरकानूनी गिरफ्तारियों पर खासी नाराजगी जताते हुए कहा कि बलूचिस्तान की समस्याओं को केवल तब ही सुलझाया जा सकता है जब असली जनप्रतिनिधियों को फैसले लेने की प्रक्रिया में शामिल किया जाए और उनकी बात सुनी जाए। एजेंसी
बलोचों को लेकर सरकार को चेताया
खान ने शहबाज सरकार को कठपुतली करार दिया और चेताया कि बलोचों की बात नहीं सुनी गई तो आगामी समय में हालात और खराब होंगे। खान ने विदेश नीति में सरकार की नाकामी पर सवाल उठाते हुए कहा कि पाकिस्तान की अफगानिस्तान के साथ 2,200 किमी लंबी सीमा है और वहां अमन-चैन सिर्फ बातचीत से कायम हो सकता है। उन्होंने दावा किया कि उनके कार्यकाल में, अफगान सरकार से तनावपूर्ण संबंधों के बावजूद,उन्होंने सीधी बातचीत की और आतंकवाद को खत्म करने में कामयाबी पाई।
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न्यायपालिका पर जमकर बरसे
खान ने 26वें संविधान संशोधन की आलोचना करते हुए कहा कि इससे पाकिस्तान की न्यायपालिका कमजोर हुई है। उन्होंने अपने कानूनी मामलों में हो रही देरी का उदाहरण देते हुए कहा कि 9 मई के मामलों में उनकी जमानत की सुनवाई महीनों से टल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार का असली मकसद उन्हें हर हाल में जेल में रखना है।
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