पाकिस्तान इस समय आर्थिक और राजनैतिक उथल-पुथल का सामना कर रहा है। इस बीच, पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री शाहिद खाकन अब्बासी के ताजा बयान ने हलचल मचा दी है। उन्होंने देश में एक बार फिर सैन्य सत्ता स्थापित होने की संभावना जताई है। पाकिस्तान के टीवी चैनल के साथ एक इंटरव्यू के दौरान उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि पाकिस्तान का आर्थिक और राजनीतिक संकट बहुत गंभीर है। उन्होंने कहा कि स्थिति ऐसी है कि अगर हालात जल्द नहीं सही हुए तो देश में वापस सैन्य शासन स्थापित हो सकता है। इस दौरान उन्होंने सभी हितधारकों से आगे का रास्ता निकालने के लिए बातचीत शुरू करने का आग्रह किया।
बता दें कि सत्तारूढ़ पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) पार्टी के वरिष्ठ नेता अब्बासी अगस्त 2017 से मई 2018 तक पाकिस्तान के 21वें प्रधानमंत्री रहे हैं।
क्या बोले पूर्व पीएम अब्बासी
रिपोर्ट्स के मुताबिक, साक्षात्कार में उन्होंने कहा कि अगर देश में सिस्टम फेल हो जाता है या जब संस्थानों के बीच संघर्ष होता है और राजनीतिक नेतृत्व आगे बढ़ने में असमर्थ होता है तो मार्शल लॉ हमेशा एक संभावना बन जाता है। पहले भी पाकिस्तान में इसी तरह के हालातों में कई बार लंबे समय तक मार्शल लॉ लगा है। पाकिस्तानी मीडिया ने उनके हवाले से कहा कि पाकिस्तान ने इससे पहले कभी भी इतनी गंभीर आर्थिक और राजनीतिक स्थिति नहीं देखी है।
इस दौरान पूर्व प्रधानमंत्री अब्बासी ने चेतावनी देते हुए कहा कि भविष्य में यहां अगर समाज और सरकार के बीच गंभीर संघर्ष हुआ तो ऐसी स्थिति में सेना भी कदम उठा सकती है। उन्होंने आगे कहा कि किसी भी देश में जब राजनीतिक और संवैधानिक प्रणाली विफल हो जाती है, तो कई बार अन्य उपाय अपनाए जाते हैं। मार्शल लॉ भी ऐसा ही है। हालांकि उन्होंने यह भी दावा किया कि आर्थिक संकट का सामना कर रहे देश में फिलहाल सेना मार्शल लॉ लगाने के विकल्प पर विचार नहीं कर रही है।
पाकिस्तान पर लंबे समय तक रहा है सैन्य शासन
पाकिस्तान के इतिहास पर अगर नजर डालें तो पता चलता है कि इसके अस्तित्व में आने के बाद देश पर लगभग आधे से ज्यादा समय तक सैन्य जनरलों द्वारा प्रत्यक्ष रूप से शासन किया गया है। यहां कई बार सेना ने तख्ता पलट कर सुरक्षा और विदेश नीति के मामलों में भी अपना हस्तक्षेप दर्ज कराया है। पिछले साल अप्रैल में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए सत्ता से हटाए जाने के बाद से ही खान का सैन्य प्रतिष्ठान के साथ टकराव चल रहा है। हालांकि हाल के सालों में पाकिस्तानी सेना ने कई बार कहा है कि वह देश की राजनीति से दूर ही रहेगी।
ये है देश की राजनीति का हाल
राजनीतिक और आर्थिक संकट के बाद पाकिस्तान संवैधानिक संकट में फंस हुआ है, क्योंकि पीएमएलएन के नेतृत्व वाली संघीय गठबंधन सरकार ने पिछले साल जनवरी में पंजाब और खैबर पख्तूनख्वा प्रांतों की विधानसभाओं के चुनाव कराने के उच्चतम न्यायालय के फैसले को स्वीकार करने से इनकार कर दिया। खान ने कहा कि अपनी हार को देखते हुए पाकिस्तान मुस्लिम लीग-नवाज (पीएमएल-एन) और उसकी सहयोगी पार्टियां देश में अभी या अक्तूबर में चुनाव नहीं चाहती हैं।
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आर्थिक संकट भी है बरकरार
बता दें कि पाकिस्तान वर्तमान में उच्च विदेशी ऋण, कमजोर स्थानीय मुद्रा और आसमान छूती मुद्रास्फीति से जूझ रहा है। आलम यह है कि पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार घटकर चार अरब डॉलर रह गया है। इसके बारे में देश के केंद्रीय बैंक ने पिछले सप्ताह जानकारी दी थी।