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'ये पागल शख्स लगा देगा पश्चिम एशिया में आग', पूर्व IAEA प्रमुख ने ट्रंप को सुनाया; खाड़ी देशों से की ये अपील

Sun, 05 Apr 2026 08:33 AM IST
Devesh Tripathi वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, वियना

सार

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से बीते महीने ईरान को शांति समझौते के लिए दी गई 10 दिनों की मोहलत खत्म होने में केवल 48 घंटे बचे हैं। इसकी वजह से पश्चिम एशिया में एक बार फिर से भीषण हमलों का दौर शुरू होने की संभावना बन गई है। वहीं, ईरान ने अमेरिका के साथ किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया है।
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पश्चिम एशिया संघर्ष - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (आईएईए) के पूर्व महानिदेशक मोहम्मद अल बारदेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के खिलाफ 48 घंटे का अल्टीमेटम जारी करने के बाद खाड़ी देशों से हस्तक्षेप करने की तत्काल अपील की है।
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पूर्व आईएईए प्रमुख ने विनाशकारी सैन्य टकराव की संभावना का जिक्र किया। बारदेई ने एक्स पर एक पोस्ट में पड़ोसी खाड़ी देशों को संबोधित करते हुए कहा, "कृपया, एक बार फिर अपनी पूरी ताकत झोंक दें, इससे पहले कि यह पागल शख्स इलाके को आग का गोला बना दे।"

ट्रंप ने दिया 48 घंटे का अल्टीमेटम
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को शांति समझौता करने के लिए एक बार फिर से अल्टीमेटम दिया है। ट्रंप ने कहा, ''याद कीजिए, जब मैंने ईरान को शांति समझौता करने के लिए 10 दिन का वक्त दिया था या होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने को कहा था। समय तेजी से निकल रहा है। 48 घंटे बाद उन पर कहर टूटेगा।''
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बारदेई ने रूस-चीन-फ्रांस से भी की अपील
मोहम्मद अल बारदेई ने अपनी गुहार को वैश्विक मंच तक पहुंचाते हुए युद्ध को रोकने में अंतर्राष्ट्रीय संस्थानों की भूमिका पर भी सवाल उठाया। संयुक्त राष्ट्र के साथ रूस-चीन-फ्रांस को संबोधित एक अलग पोस्ट में उन्होंने पूछा कि क्या इस पागलपन को रोकने के लिए कुछ भी नहीं किया जा सकता है?

10 दिन के लिए हमले रोकने का किया था एलान
बीते महीने 26 मार्च से डोनाल्ड ट्रंप ने नाटकीय अंदाज में ईरान के ऊर्जा बुनियादी ढांचे पर अमेरिकी हमलों को छह अप्रैल, 2026 तक रोकने की बात की थी। उस समय अमेरिकी राष्ट्रपति ने तर्क दिया था कि यह फैसला ईरानी सरकार के अनुरोध पर किया गया था। उन्होंने यह भी कहा था कि मामले को हल करने के लिए कूटनीतिक बातचीत आगे बढ़ रही है।

हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति के इस एलान के बावजूद ईरान पर इस्राइली हमले जारी रहे। इसकी वजह से ईरान ने अमेरिका से किसी भी तरह की बातचीत से इनकार कर दिया। ईरान ने अमेरिका पर युद्धविराम और बातचीत की आड़ में तेहरान को निशाना बनाने का आरोप लगाया। 
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