नेपाल में नया संविधान बनने के बाद से नागरिकता के सवाल पर जारी विवाद अब दूर हो जाने की संभावना है। नेपाल सरकार ने इस बारे में देश के मधेसी समुदाय की मांग मान ली है। इसके तहत अब किसी नेपाली नागरिक से विवाह करने वाली महिला तुरंत नेपाल की नागरिकता हासिल करने की प्रक्रिया शुरू कर सकेगी। पहले पेश किए गए बिल में प्रावधान था कि ऐसी प्रक्रिया विवाह के सात साल बाद ही शुरू की जा सकेगी। पिछले हफ्ते नेपाल सरकार ने कई वर्षों में संसद में लंबित पड़े उस बिल को वापस ले लिया था।
नए तैयार किए गए बिल में बच्चों को नेपाल में जन्म के आधार पर नागरिकता देने का प्रावधान भी किया गया है। इसमें कहा गया है कि नेपाली महिला से जन्म लेने वाले बच्चे/बच्ची को नेपाल की नागरिकता हासिल करने का हक होगा, भले उसके पिता के बारे में जानकारी उपलब्ध ना हो। बच्चा अगर नेपाल में रह रहा हो, तो उसे नागरिकता प्रदान की जाएगी। हालांकि इसमें यह प्रावधान भी जोड़ दिया गया है कि अगर बाद में यह पता चला कि बच्चे का पिता विदेशी है, तो बच्चे की नागरिकता रद्द कर दी जाएगी। उस स्थिति में बच्चे को उस शर्त के आधार पर नागरिकता प्राप्त करने की अर्जी देनी होगी, जो नेपाल की नागरिकता चाहने वाले विदेशियों के लिए तय है।
इस बिल में दक्षिण एशिया सहयोग संगठन (सार्क) के किसी सदस्य देश की नागरिकता ले चुके नेपाली को अनिवासी नेपाली का दर्जा देने का प्रावधान किया गया है। अनिवासी नेपाली को नेपाल में वहां के नागरिक की तरह ही आर्थिक, सामाजिक, और सांस्कृतिक अधिकार मिलेंगे। लेकिन उसे राजनीतिक अधिकार नहीं मिलेगा।
सरकारी सूत्रों ने कहा है कि इस बिल को संसद के मौजूदा सत्र में ही पास कराया जाएगा। समझा जाता है कि इस बिल के पारित होने पर लाखों बच्चों को नेपाल की नागरिकता मिलने का रास्ता साफ हो जाएगा, जो अभी नागरिक ना होने की वजह से संवैधानिक अधिकारों से वंचित हैं। इसी तरह हजारों महिलाओं को भी तुरंत नागरिकता मिल सकेगी।