पूर्वी लद्दाख में सीमा को लेकर बीते कई महीनों से जारी सैन्य गतिरोध के बीच भारत ने एक बार फिर चीन को कड़ा संदेश दिया है। यूरोपीय देशों की यात्रा पर आए विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने साफ कर दिया कि भारत अपनी क्षेत्रीय अखंडता के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
उन्होंने कहा कि चीन ने सीमा पर यथास्थिति को बदलने का जो एकतरफा प्रयास किया है, वह द्विपक्षीय समझौते को नुकसान पहुंचाने वाला है। भारत इसे कभी स्वीकार नहीं करेगा।
शृंगला ने जर्मनी के एक न्यूज चैनल को दिए साक्षात्कार में कहा, अगर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर एकतरफा कदम उठाकर वहां की स्थिति को बदलने का प्रयास होता है, तो उसका दुष्प्रभाव आपसी संबंधों पर पड़ना निश्चित है। चीन ने ऐसे ही कदम उठाकर हालात खराब किए हैं। चीनी सैनिकों ने लगातार तीन प्रयास कर पूर्वी लद्दाख की स्थिति को और खराब किया।
पैंगोंग लेक के उत्तरी और दक्षिणी किनारों पर 29 अगस्त और 8 सितंबर के बीच ये प्रयास हुए। इन प्रयासों में चीनी सैनिकों ने हवा में फायर भी किए। दोनों देशों की सीमा पर बीते 45 साल में यह पहली फायरिंग थी।
भारत स्पष्ट कर देना देना चाहता है कि वह अपनी क्षेत्रीय अखंडता के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं होने देगा और न ही इस मसले पर कोई समझौता करेगा। इस मसले पर भारतीय सेनाएं दृढ़ हैं और वे किसी भी चुनौती से टकराने को तैयार हैं।
क्वाड देशों की योजना से जुड़े सवाल पर विदेश सचिव ने कहा, यह भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया की समान सोच पर आधारित गठबंधन है। यह हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में अंतरराष्ट्रीय कानून के अनुसार स्वतंत्र आवागमन का पक्षधर है। यह सभी देशों की स्वतंत्रता और संप्रभुता के सम्मान की बात करता है। क्वाड भारत, जापान, अमेरिका और ऑस्ट्रेलिया का संगठन है।