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म्यांमार में श्रृंगला: पड़ोसी देश में लोकतंत्र की बहाली पर दिया जोर, हिंसा को पूरी तरह रोकने की अपील

Thu, 23 Dec 2021 03:58 PM IST
गौरव पाण्डेय वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, नेपीडॉ

सार

तख्तापलट के बाद गंभीर हालात से गुजर रहे पड़ोसी देश म्यांमार की यात्रा पर गए विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला ने यहां के शीर्ष अधिकारियों से मुलाकात की। 
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विदेश सचिव हर्षवर्धन श्रृंगला - फोटो : एएनआई (फाइल)
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विस्तार
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विदेश सचिव हर्षवर्धन शृंगला ने म्यांमार की राष्ट्रीय प्रशासनिक परिषद के अध्यक्ष और वरिष्ठ प्रतिनिधियों से मिलकर पड़ोसी देश में जल्द से जल्द लोकतंत्र की बहाली पर जोर दिया। उन्होंने म्यांमार में भारत के सुरक्षा संबंधी मामलों को भी उठाया और भारतीय सीमा से लगे इलाकों में हिंसा को रोकने तथा शांति एवं स्थिरता कायम करने की जरूरत पर जोर दिया।

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भारत के विदेश सचिव शृंगला अपनी दो दिवसीय दौरे पर म्यांमार पहुंचे हैं। म्यांमार की सेना द्वारा एक फरवरी को आंग सान सू ची की लोकतांत्रिक ढंग से चुनी गई सरकार को अपदस्थ करने के बाद यह भारत की तरफ से यहां किया गया पहला उच्च स्तरीय संपर्क है। 

शृंगला ने कहा कि भारत एक लोकतंत्र के रूप में और करीबी पड़ोसी के रूप में म्यांमार में लोकतांत्रिक परिवर्तन की प्रक्रिया में शामिल रहा है। इसलिए हमारा जोर यहां लोकतंत्र की वापसी पर है। इसके तहत बंदियों और कैदियों की रिहाई, वार्ता के माध्यम से मुद्दों का समाधान और सभी तरह की हिंसा को पूर्ण खत्म करना जरूरी है। 
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विदेश मंत्रालय ने कहा कि शृंगला ने आसियान की पहल के लिए भारत के मजबूत और लगातार समर्थन की पुष्टि की और उम्मीद जताई कि पांच सूत्रीय सहमति के आधार पर व्यावहारिक व रचनात्मक ढंग से प्रगति की जाएगी।

बिप्लव त्रिपाठी मामले को लेकर सुरक्षा संबंधी मामला भी उठाया
विदेश मंत्रालय ने बताया कि इस दौरे पर शृंगला ने दक्षिणी मणिपुर के चुराचांदपुर जिले में हाल की घटना के संदर्भ में भारत के सुरक्षा संबंधी मामलों को भी उठाया। पिछले माह 46 असम राइफल्स के कमांडिंग अफसर कर्नल बिप्लव त्रिपाठी, उनकी पत्नी और 8 वर्षीय बेटे के साथ असम राइफल्स के चार जवान यहां घात लगाकर किए गए धमाके में मारे गए थे। राज्य ने इसके लिए विद्रोही गुट पर आरोप लगाया था।

एक-दूसरे के क्षेत्र में प्रतिकूल गतिविधियां रोकेंगे 
विदेश सचिव ने किसी भी तरह की हिंसा को खत्म करने और सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने की जरूरत पर बल दिया। दोनों पक्षों ने संबंधित क्षेत्रों का इस्तेमाल किसी अन्य की प्रतिकूल गतिविधियों के लिए न होने देने की प्रतिबद्धता जताई। बता दें कि भारत अपने पड़ोसी म्यांमार के साथ 1,700 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करता है। इसमें नगालैंड और मणिपुर समेत कई पूर्वोत्तर राज्य आते हैं।

10,000 टन चावल-गेहूं का अनुदान
विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत ने म्यांमार को कोरोना वायरस के भारत में बने टीकों की 10 लाख खुराक सौंपने के अलावा 10,000 टन चावल और गेहूं का भी अनुदान दिया। शृंगला ने यहां कई तरह की मदद की घोषणा की। उन्होंने यह मदद रेडक्रॉस सोसाइटी और संबंधित क्षेत्र में काम करने वाले संगठनों को सौंपी। उन्होंने म्यांमार को निरंतर भारत के मानवीय समर्थन की पुष्टि की।

भारत की सुरक्षा से जुड़े मुद्दे उठाए
बयान के अनुसार बैठकों के दौरान श्रृंगला ने इस बात पर जोर दिया कि म्यांमार में लोकतंत्र की जल्द से जल्द वापसी, हिरासत में रखे गए लोगों की रिहाई, बातचीत के माध्यम से विवादों का समाधान और हर तरह की हिंसा पर पूरी तरह रोक जरूरी है और यह भारत के हित में है। इस यात्रा से भारत की सुरक्षा से जुड़े, खास तौर पर दक्षिणी मणिपुर में चूरचंदपुर जिले में हालिया घटना को लेकर मुद्दों को उठाने का मौका भी मिला।

समर्थन की प्रतिबद्धता भी दोहराई
विदेश मंत्रालय ने कहा कि श्रृंगला ने दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (आसियान) पहल को भारत की ओर से लगातार, मजबूत और निरंतर समर्थन की प्रतिबद्धता दोहराई। इसके साथ ही उन्होंने भारतीय सीमा से सटे इलाकों में हिंसा रोकने और शांति व स्थिरता स्थापित करने पर बल दिया। इसके साथ ही उन्होंने कोविड-19 महामारी के खिलाफ म्यांमार रेड क्रॉस सोसाइटी को भारत में निर्मित टीकों की 10 लाख खुराकें सौंपीं।

मंत्रालय ने कहा कि प्रशासन परिषद के साथ वार्ता के दौरान दोनों पक्षों ने यह सुनिश्चित करने के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई कि उनके संबंधित क्षेत्रों को किसी भी शत्रुतापूर्ण गतिविधियों के लिए उपयोग करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उल्लेखनीय है कि भारत और म्यांमार लगभग 1700 किलोमीटर लंबी सीमा साझा करते हैं। इस वजह से म्यांमार के किसी भी घटनाक्रम का भारत के सीमावर्ती क्षेत्रों पर सीधा-सीधा असर पड़ता है।

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