अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (एफडीए) ने डेंगू के पहले टीके डेंगवाक्सिया के इस्तेमाल को इजाजत दे दी है लेकिन साथ ही इसपर महत्वपूर्ण प्रतिबंध भी लगा दिए हैं। इसकी वजह है टीके की वजह से कुछ लोग गंभीर बीमारी के खतरे में आ जाते हैं। इस टीके को मंजूरी देते हुए एजेंसी ने गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य को स्वीकार किया जिससे दुनियाभर के लाखों लोगों को फायदा पहुंचेगा।
इस निर्णय से उस उत्पाद को मदद मिली है जिसे कि संभावित खतरों की वजह से रोक दिया गया था। ड्यूक-एनयूएस मेडिकल स्कूल के डुआन गबलर ने कहा, 'यह दुनिया को बताएगा कि यदि टीके को ठीक तरह से प्रयोग किया जाए तो यह प्रभावी हो सकता है।'
गबलर उन आविष्कारकों में से एक हैं जिन्होंने टकेडा के डेंगू टीके में अहम भूमिका निभाई थी और उन्होंने अतीत में सनोफी को भी परामर्श दिया था जिसने डेंगवाक्सिया का निर्माण किया है। सनोफी 2015 से डेंगवाक्सिया बेच रहा है। मगर इस टीके को 2017 में तब झटका मिला जब फिलीपींस ने इसे स्कूल के छात्रों में वितरित किया था लेकिन इसके उपयोग पर रोक लगा दी और सनोफी के लाइसेंस को रद्द कर दिया था।
यह निर्णय तब लिया गया जब सनोफी ने बताया कि दुर्लभ मामलों में यदि उन लोगों को टीके लगाए जाते हैं जिन्हें कभी डेंगू नहीं हुआ और वह बाद में इससे संक्रमित हो जाते हैं तो उन्हें गंभीर बीमारी हो सकती है।
एक मई को एफडीए ने नौ साल से सोलह साल के उन बच्चों को डेंगू का टीका लगाने की इजाजत दे दी जो उस क्षेत्र में रहते हैं जहां डेंगू होता रहता है। लैब टेस्ट के जरिए पता चला कि वहां सभी इस बीमारी से संक्रमित हैं। दुनिया की एक तिहाई से ज्यादा जनसंख्या उन क्षेत्रों में रहती है जहां डेंगू वायरस का खतरा बहुत ज्यादा है। यह बीमारी मच्छरों से फैलती है। एक आकलन के अनुसार दुनियाभर में 400 मिलियन लोग इस वायरस से संक्रमित होते हैं।