अमेरिका के न्याय विभाग ने पांच चीनी नागरिकों पर भारत सहित विभिन्न देशों की सरकारी वेबसाइटों पर साइबर अटैक करने और संवेदनशील डाटा चुराने के आरोप तय किए हैं। इन पांचों पर 100 से ज्यादा कंपनियों व संस्थानों का कारोबारी व शोध संबंधित डाटा चुराने का भी आरोप लगा है। मामले में चोरी की गई जानकारियां बेचने में चीनियों की मदद पर दो मलयशियाई नागरिकों को भी आरोपी बनाकर गिरफ्तार कर लिया गया है। आरोपी चीनी नागरिक भगोड़ा घोषित किए गए हैं।
अमेरिका के डिप्टी अटॉर्नी जनरल जैफरी रोजन ने बताया कि 2019 में भारत सरकार की वेबसाइट्स और वर्चुअल प्राइवेट नेटवर्क को इन चीनियों ने निशाना बनाया। सरकार के सुरक्षित कंप्यूटरों में ‘कोबाल्ट स्ट्राइक’ नाम से मालवेयर इंस्टॉल किए गए।
इसी प्रकार के हमले वियनतनाम और यूनाइटेड किंगडम की सरकारी तंत्र पर भी किए गए, लेकिन यूनाइटेड किंगडम मजबूत सुरक्षा की वजह से बच गया। जैफरी ने यह भी आरोप लगाया कि चीन की कम्युनिस्ट पार्टी साइबर अपराधियों को अपने देश में प्रश्रय दे रही है। उनके जरिए चीन दूसरे देशों पर साइबर अटैक व डाटा चोरी करवा रहा है।
इन्हें बनाया निशाना
इस मामले में सॉफ्टवेयर व हार्डवेयर डवलपमेंट, दूरसंचार, सोशल मीडिया और वीडियोगेम कंपनियां, गैर-सरकारी संस्थान, विश्वविद्यालय, विचार संस्थाएं, विदेशी सरकारें, लोकतंत्र समर्थक राजनीतिज्ञ व हांगकांग के प्रदर्शनकारी इनके निशाने पर रहे। इनके यहां से सोर्स कोड, सॉफ्टवेयर कोड सर्टिफिकेट, उपभोक्ताओं का डाटा, कारोबारी सूचनाएं, चुराए गए। वहीं रेनसमवेयर भी हमला किया गया और क्रिप्टोकरेंसी बनाने के लिए अनाधिकृत रूप से पीड़ितों के कंप्यूटर उपयोग हुए।
चीनी सरकारी कंपनी भी शामिल
इस मामले में चीनी सरकारी कंपनी चेंगदू 404 नेटवर्क टेक्नोलॉजी को भी शामिल पाया गया है। इनके रैकेट ने अमेरिका, भारत सहित ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील, चिली, हांगकांग, इंडोनेशिया, जापान, मलयशिया, पाकिस्तान, सिंगापुर, दक्षिण कोरिया, ताइवान, थाईलैंड और वियतनाम की कंपनियों व संस्थाओं को नुकसान पहुंचाया है।