श्रीलंका में रानिल विक्रमसिंघे को दोबारा पीएम बनाकर 51 दिन से देश में जारी सियासी गतिरोध खत्म होने के बाद पहली बार मंगलवार को संसद की कार्यवाही होने वाली है। हालांकि राष्ट्रपति मैत्रीपाला सिरीसेना और विक्रमसिंघे के बीच मंत्रिमंडल में पदों को लेकर अब तक सहमति नहीं बन पाई है। इस बीच अमेरिका ने विक्रमसिंघे के साथ काम करने की इच्छा जताई।
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रॉबर्ट पलाडिनो ने कहा, हम खुश हैं कि श्रीलंकाई नेतृत्व ने पिछले कई हफ्तों से चल रहे सियासी संकट को संवैधानिक नियमों और कानून के मुताबिक सुलझा लिया है। 26 अक्टूबर को राष्ट्रपति द्वारा विक्रमसिंघे को पीएम पद से हटाकर पूर्व राष्ट्रपति महिंदा राजपक्षे को उनकी जगह नियुक्ति देने के बाद से देश में शुरू हुई राजनीतिक उथल-पुथल रविवार को विक्रमसिंघे के दोबारा पीएम बनने के बाद खत्म हुई। संसद के अध्यक्ष कारू जयसूर्या मंगलवार को एक बैठक की अध्यक्षता करने वाले हैं जिसमें इस हफ्ते संसद की कार्यवाही को लेकर फैसला होगा।
इस बैठक में यूपीएफए के करीब 10 सांसद यूएनपी की ओर से शामिल हो सकते हैं। सिरिसेना के विश्वासपात्र निशांत मुथुहेट्टीगामा ने कहा, एसएलएफपी ने फैसला किया है कि उनकी ओर से कोई भी सरकार में शामिल नहीं होगा। सिरीसेना खेमा अब एसएलएफपी और राजपक्षे की एसएलपीपी में बंट गया है।
राजपक्षे बने मुख्य विपक्षी नेता
पिछले दो माह से सत्ता में भारी उठापटक के बीच पीएम पद की भूमिका निभाने वाले महिंदा राजपक्षे अब संसद में मुख्य विपक्षी नेता बन गए हैं। विक्रमसिंघे के पीएम बनने के बाद राजपक्षे ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। संसद अध्यक्ष कारू जयसूर्या ने राजपक्षे की इस नियुक्ति की घोषणा की। राजपक्षे ने मुख्य तमिल पार्टी आर. संपंथन के अनुभवी नेता की जगह ली है।