पहलगाम आतंकी हमले की पहली बरसी पर विशेषज्ञों ने हमले के पैटर्न और अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क पर गंभीर सवाल उठाए हैं। हांगकांग स्थित एशियन ह्यूमन राइट्स कमीशन के रिसर्चर बशीर नावेद के अनुसार, इस तरह के हमले एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा होते हैं, जिनमें धर्म के आधार पर लोगों को निशाना बनाया जाता है। इसके पीछे बड़े आतंकी नेटवर्क की भूमिका हो सकती है।
आज पहलगाम आतंकी हमले को एक साल पूरा हो गया है। इस मौके पर विशेषज्ञों ने हमले के पीछे के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। हांगकांग स्थित एशियन ह्यूमन राइट्स कमीशन (AHRC) के पूर्व रिसर्चर बशीर नावेद ने इस बारे में जानकारी दी है। उन्होंने दावा किया कि पहलगाम हमले और पुराने आतंकी हमलों में काफी समानताएं हैं।
विज्ञापन
बशीर नावेद ने पहलगाम की घटना को बेहद निंदनीय बताया। उन्होंने कहा कि आतंकी संगठन एक तय पैटर्न पर काम करते हैं। वे सबसे पहले बस को रोकते हैं और यात्रियों को नीचे उतारते हैं। इसके बाद वे लोगों की पहचान पूछते हैं कि कौन हिंदू है और कौन मुस्लिम। पहचान करने के बाद ही वे लोगों को निशाना बनाते हैं। नावेद ने बताया कि पाकिस्तान के खैबर पख्तूनख्वा के कुर्रम जिले और बलूचिस्तान में भी इसी तरीके से हमले हुए हैं। वहां भी लोगों की पहचान और धर्म के आधार पर उनकी हत्या की गई।
नावेद के अनुसार, ऐसे हमले कोई अलग-थलग घटनाएं नहीं हैं, बल्कि ये एक बड़े पैटर्न को दर्शाते हैं और सोची-समझी रणनीति का हिस्सा हैं। गिलगित-बाल्टिस्तान और बलूचिस्तान में भी हमलावरों ने लोगों की जाति और धर्म देखकर उन्हें मारा। उन्होंने दावा किया कि इन सभी आतंकियों को ट्रेनिंग देने वाले लोग एक ही हैं। पहलगाम हमले को अंजाम देने वालों को भी उन्हीं लोगों ने ट्रेनिंग दी थी। उन्होंने कहा यह एक बड़े नेटवर्क का हिस्सा लगता है।
पहलगाम हमले में 25 से ज्यादा पर्यटकों की मौत हुई थी। इस घटना की दुनिया भर में आलोचना हुई थी। रिसर्चर नावेद ने पाकिस्तान सरकार की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने इस हमले की कोई जांच नहीं कराई। वहां किसी भी तरह की न्यायिक जांच नहीं हुई। उन्होंने यह भी पूछा कि आतंकी संगठनों के बड़े नेताओं पर अब तक मुकदमा क्यों नहीं चला।
उन्होंने लश्कर-ए-तैयबा और लश्कर-ए-झांगवी जैसे खतरनाक संगठनों का जिक्र किया। नावेद ने आरोप लगाया कि इन संगठनों को खास तौर पर कश्मीर और भारत में हमले करने के लिए तैयार किया गया है। इन समूहों से जुड़े लोग आज भी पाकिस्तान में सुरक्षित हैं। उन्होंने मसूद अजहर का उदाहरण देते हुए कहा कि विमान अपहरण के बाद जब वह पाकिस्तान पहुंचा, तो उसका स्वागत एक योद्धा की तरह किया गया। उसके समर्थन में बड़ी रैलियां निकाली गईं। अंत में नावेद ने कहा कि आतंकवाद कहीं भी हो, उसे पूरी तरह से खत्म कर देना चाहिए।