अंतरिक्ष की दुनिया की एक महत्वपूर्ण घटना के तहत आज ब्लैक होल ( Black Hole ) की वास्तविक तस्वीर जारी की गई। अंतरिक्ष के बारे में जानने को उत्सुक दुनिया भर के उत्साही लोगों का कहना है कि वे ब्लैक होल की पहली वास्तविक तस्वीर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
दुनिया भर में स्थित छह दूरबीनों के डेटा का उपयोग करते हुए, ईवेंट होरिजन टेलीस्कोप (ईएचटी) परियोजना में शामिल वैज्ञानिकों ने मिल्की वे आकाशगंगा के केंद्र में स्थित ब्लैक होल सैजिटेरियस ए* और एक अन्य विशालकाय ब्लैक होल जो 5.35 करोड़ प्रकाश-वर्ष दूर आकाशगंगा एम87 में है, की तस्वीर निकाली है।
सैजिटेरियस ए* को पृथ्वी से 26 हजार प्रकाश वर्ष दूर मिल्की वे के बीच में देखा गया है। इसका द्रव्यमान 40.1 लाख सूर्यों के बराबर है। वहीं, दूसरा ब्लैक होल सबसे बड़े ब्लैक होल में गिना जाता है। यह सूर्य से 6 अरब गुना ज्यादा बड़ा और सैजिटेरियस ए* से 1500 गुना ज्यादा बड़ा है। यह गैलेक्सी एम87 के बीच में है।
वैज्ञानिकों का कहना है कि इससे मानवीय कल्पना को अपनी ओर खींचने वाले स्पेसटाइम फैब्रिक के रहस्यमय, विकृत क्षेत्र के आकार का खुलासा हो सकता है। इससे कई साइंस-फिक्शन फिल्में बनाने की प्रेरणा मिल सकेगी और इससे आने वाली पीढ़ियों के लिए शोध सामग्री उपलब्ध हो सकती है।
यूरोपीय अंतरिक्ष एजेंसी के खगोलविद् और ब्लैक होल के विशेषज्ञ पॉल मैक्नमारा ने बताया कि पिछले 50 वर्ष से ज्यादा समय से वैज्ञानिकों ने देखा है कि हमारी आकाशगंगा के केंद्र में कुछ बहुत चमकीला है। पॉल ने बताया कि ब्लैक होल में इतना मजबूत गुरुत्वाकर्षण है कि तारे 20 वर्ष में इसकी परिक्रमा कर पाते हैं। वहीं, हमारी सौर प्रणाली में आकाशगंगा की परिक्रमा में 23 करोड़ साल लगते हैं।
क्या है ब्लैक होल?
ब्लैक होल ऐसी खगोलीय शक्ति है, जिसका गुरुत्वाकर्षण क्षेत्र बहुत शक्तिशाली होता है। इसके खिंचाव से कुछ भी नहीं बच सकता है। ब्लैक होल के चारों ओर एक सीमा होती है जिसे घटना क्षितिज कहते हैं। इसमें वस्तुएं गिर तो सकती हैं लेकिन वापस नहीं आ सकतीं। इसीलिए इसे ब्लैक होल कहा जाता है। यह अपने ऊपर पड़ने वाले सारे प्रकाश को अवशोषित कर लेता है और उसके बदले में कुछ भी परावर्तित नहीं करता है।