फिनलैंड लगातार आठवीं बार दुनिया का सबसे खुशहाल देश बना है। 147 देशों की इस रैंकिंग में भारत को 118वां स्थान मिला है। पिछले साल इस रैंकिंग में भारत 126वें नंबर पर था। इस तरह भारत की रैंकिंग में आठ स्थानों का सुधार हुआ है। हालांकि, चौंकाने वाली बात यह है कि इस सूची में भारत से इस बार भी पाकिस्तान ने बाजी मार ली है। पाकिस्तान को हैप्पीनेस इंडेक्स में 109वीं रैंकिंग मिली है।
खुश लोगों की रैंकिंग में अमेरिका अब तक के सबसे निचले पायदान पर पहुंच गया है। रैंकिंग में शीर्ष 20 में यूरोपीय देशों का दबदबा है, लेकिन कुछ अपवाद भी हैं। हमास के साथ युद्ध के बावजूद, इस्राइल आठवें स्थान पर है। कोस्टा रिका और मेक्सिको पहली बार खुश देशों के शीर्ष 10 में शामिल हुए, ये क्रमशः छठे और 10वें स्थान पर हैं। अमेरिका इस रैंकिंग में अपने अब तक के सबसे निचले स्थान 24वें नंबर पर पहुंच गया है। इससे पहले 2012 में वह 11वें स्थान पर था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि पिछले दो दशकों में अमेरिका में अकेले भोजन करने वाले लोगों की संख्या में 53 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। सूची में यूनाइटेड किंगडम 23 स्थान पर है। इस रैंकिंग में अफगानिस्तान को दुनिया का सबसे दुखी देश बताया गया है। अफगान महिलाओं का कहना है कि उनका जीवन विशेष रूप से कठिन है। पश्चिमी अफ्रीका में सिएरा लियोन दूसरा सबसे दुखी देश है, उसके बाद लेबनान है, जो नीचे से तीसरे स्थान पर है।
अफगानिस्तान (नंबर 147) एक बार फिर सूची में सबसे नीचे है। सिएरा लियोन (नंबर 146), लेबनान (नंबर 145), मलावी (नंबर 144) और जिम्बाब्वे (नंबर 143) खुशहाली के मामले में सबसे निचले पांच देशों में शामिल हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि स्वास्थ्य और धन के अलावा, खुशी को प्रभावित करने वाले कुछ कारक भ्रामक रूप से सरल लगते हैं। रिपोर्ट के अनुसार दूसरों के साथ भोजन साझा करना, सामाजिक समर्थन के लिए किसी पर निर्भर होना और परिवार का आकार आपकी खुशी को प्रभावित करते हैं। उदाहरण के लिए, मेक्सिको और यूरोप में, चार से पांच लोगों का परिवार खुशी के उच्चतम स्तर पर हैं। निष्कर्षों के अनुसार, दूसरों की दयालुता पर विश्वास करना भी पहले की अपेक्षा खुशी से अब कहीं अधिक निकटता से जुड़ा हुआ है।
उदाहरण के तौर पर, रिपोर्ट बताती है कि जो लोग यह शिद्दत से मानते हैं कि दूसरे लोग उनका खोया हुआ बटुआ भी लौटाने को तैयार हो जाएंगे, वे किसी जनसंख्या की समग्र खुशी का एक मजबूत कारक होते हैं। अध्ययन में पाया गया कि नॉर्डिक देश में ऐसा मानने वाले लोगों की संख्या सबसे अधिक है।
रिपोर्ट के अनुसार विश्व भर में लगभग हर पांचवें युवा वयस्को को कोई सामाजिक मदद नहीं मिलती। अध्ययन में कहा गया है कि चिंताजनक बात यह है कि 2023 में दुनिया भर के 19 प्रतिशत युवा वयस्कों ने बताया कि उनके पास कोई ऐसा व्यक्ति नहीं है जिस पर वे सामाजिक सहायता के लिए भरोसा कर सकें। यह 2006 की तुलना में 39 प्रतिशत अधिक है। इस रिपोर्ट को तैयार करने के के लिए सभी देशों को 2022 से 2024 के दौरान उनके स्व-मूल्यांकित जीवन के औसत के अनुसार रैंकिंग दी गई है।
इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश है- खुशी केवल संपत्ति या नौकरी से नहीं आती। यह इस बात पर भी निर्भर करती है कि हम अपने समाज को कितना भरोसेमंद और सहायक बनाते हैं। तो अगली बार जब आप अपने परिवार के साथ बैठकर खाना खाएं, किसी दोस्त की मदद करें, या किसी अजनबी पर भरोसा करें-समझ लीजिए, आप अपने देश की खुशहाली में एक ईंट जोड़ रहे हैं।