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उठने लगे सवाल: क्या कारगर होगी न्यूनतम ग्लोबल टैक्स दर की व्यवस्था, जी-7 देशों में बनी सहमति

Mon, 07 Jun 2021 06:22 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, लंदन

सार

गैर सरकारी संस्था फेयर टैक्स फाउंडेशन के प्रमुख पॉल मोनाघन ने द गार्जियन से कहा कि जी-7 वित्त मंत्रियों की मौजूदा विज्ञप्ति के मुताबिक तो अमेजन नई कर व्यवस्था के दायरे में नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि अगर वित्त मंत्रियों ने इस बारे में कुछ और सोचा है, तो कम से कम सामने नहीं आया है...
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जी 7 शिखर सम्मेलन - फोटो : Agency
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विस्तार
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जी-7 देशों के बीच वैश्विक न्यूनतम कॉरपोरेट टैक्स के प्रस्ताव पर जो सहमति बनी है, क्या उससे अमेजन जैसी कंपनियों को वाजिब टैक्स चुकाने के लिए मजबूर किया जा सकेगा? अब ऐसे कई गंभीर सवाल उठाए गए हैं। शनिवार को यहां जी-7 देशों के वित्त मंत्रियों की बैठक में सहमति बनी थी कि बहुराष्ट्रीय कंपनियों के मुनाफे पर कम से कम 15 फीसदी टैक्स लगना चाहिए। उस रोज कहा गया था कि इस बारे में प्रस्ताव अब जी-20 देशों की बैठक में रखा जाएगा। दूसरे देशों के साथ भी इस पर सहमति बनाने की कोशिश की जाएगी। वहां सहमति बनने के बाद इस पर अमल की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।

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लेकिन उसके एक रोज बाद विशेषज्ञों ने ध्यान दिलाया कि जी-7 देशों ने वैश्विक टैक्स रेट का जो प्रस्ताव सामने रखा है, उसमें कई खामियां हैं। उन खामियों का लाभ उठाकर अमेजन जैसी कंपनियां अपने मुनाफे पर 15 फीसदी टैक्स चुकाने से बच सकती हैं। जबकि इस प्रस्ताव का मुख्य मकसद अमेजन, गूगल, फेसबुक, एपल, माइक्रोसॉफ्ट जैसी बड़ी टेक कंपनियों को ही टैक्स दायरे में लाना है, जिनका कारोबार दुनिया भर में फैला हुआ है। इन कंपनियों ने अपने मुख्यालय उन देशों में बना रखे हैं, जहां टैक्स दरें बहुत कम या शून्य हैं।

अमेजन दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में एक है। उसका 2020 में बाजार मूल्य 1.6 ट्रिलियन डॉलर था। उसने पिछले साल 386 अरब डॉलर की बिक्री की। यूरोप में कंपनी का मुख्यालय लक्जमबर्ग में है। लक्जमबर्ग के नियमों का लाभ उठाते हुए अमेजन ने यूरोप में की गई अपनी बिक्री पर शून्य कॉरपोरेट टैक्स चुकाया। तब से ये कंपनी सरकारों के खास निशाने पर रही है। साथ ही इस मिसाल से दुनिया में कर के ढांचे को बदलने की मुहिम में गति आई है।
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विश्लेषकों ने ध्यान दिलाया है कि 2020 में अमेजन ने बड़ी बिक्री की, लेकिन उस पर उसने सिर्फ 6.3 फीसदी का मुनाफा दिखाया। बाकी आमदनी का उसने बाजार में अपना हिस्सा और बढ़ाने के मकसद पुनर्निवेश कर दिया। इंग्लैंड की शेफील्ड यूनिवर्सिटी स्थित मैनेजमेंट स्कूल में विजिटिंग प्रोफेसर रिचर्ड मर्फी ने ध्यान दिलाया है कि जी-7 वित्त मंत्रियों के प्रस्ताव में ये शर्त रखी गई है कि न्यूनतम टैक्स का प्रावधान उन कंपनियों पर ही लागू होगा, जिन्हें कम से कम 10 फीसदी मुनाफा हुआ हो। उन्होंने लंदन के अखबार द गार्जियन से कहा- ‘मौजूदा प्रस्ताव को कंपनियां आसानी से ठेंगा दिखा देने की स्थिति में होंगी। अगर सरकारों ने प्रस्तावित प्रावधानों की खामियां दूर नहीं कीं, तो यही कहा जाएगा कि उन्होंने झूठी उम्मीद जगाई है।’

गैर सरकारी संस्था फेयर टैक्स फाउंडेशन के प्रमुख पॉल मोनाघन ने द गार्जियन से कहा कि जी-7 वित्त मंत्रियों की मौजूदा विज्ञप्ति के मुताबिक तो अमेजन नई कर व्यवस्था के दायरे में नहीं आएगी। उन्होंने कहा कि अगर वित्त मंत्रियों ने इस बारे में कुछ और सोचा है, तो कम से कम सामने नहीं आया है।

वैसे कई जानकारों ने यह भी कहा है कि अभी सहमति सिर्फ जी-7 देशों बनी है। अभी इस पर जी-20 और धनी देशों के संगठन- ऑर्गनाइजेशन फॉर इकोनॉमिक कोऑपरेशन एंड डेवलपमेंट (ओईसीडी) में विचार होना है। वहां उन देशों को इस पर राजी करना आसान नहीं होगा, जिन्हें कम या शून्य टैक्स सिस्टम से लाभ हो रहा है। आयरलैंड और लक्जमबर्ग ऐसे ही देश हैं।

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