ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम यात्रा की से पहले उनकी ताबूत लोगों के दर्शन के लिए रखा गया। अमेरिका और इस्राइल के साथ युद्ध की शुरुआत में ईरान के सर्वोच्च नेता की मौत हो गई। उनके निधन के तीन महीनों बाद लोगों ने दिवंगत अयातुल्ला अली खामेनेई के लिए कई दिनों का अंतिम यात्रा और दफन समारोह आयोजित करने का फैसला लिया।
खामेनेई के सम्मान में सड़कों पर उतरेंगे लोग
खामेनेई की अंतिम यात्रा के बारे में जानें यह बात
धार्मिक दृष्टि से क्यों खास है इमाम रजा तीर्थस्थल?
अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम यात्रा में क्या हुआ?
6 जून, 1989 को, लाखों ईरानी 1979 की इस्लामी क्रांति के नेता खुमैनी को दफनाने के लिए सड़कों पर उतर आए। स्थिति जल्द ही बेकाबू हो गई। लोग भीषण गर्मी में लयबद्ध तरीके से अपनी छाती पीट रहे थे। महिलाओं की चीखें शोर के बीच गूंज रही थीं। शोक मनाने वालों की भीड़ ताबूत की ओर दौड़ी, जिससे 86 वर्षीय धार्मिक नेता का सफेद कपड़े में लिपटा हुआ शरीर भीड़ में गिर गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस अफरा-तफरी में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और लगभग 11,000 अन्य घायल हो गए। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि खामेनेई के अंतिम यात्रा के दौरान भी इसी तरह की भगदड़ मच सकती है। अगर भीड़ लाखों में हो।
अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी के अंतिम यात्रा में क्या हुआ?
6 जून, 1989 को, लाखों ईरानी 1979 की इस्लामी क्रांति के नेता खुमैनी को दफनाने के लिए सड़कों पर उतर आए। स्थिति जल्द ही बेकाबू हो गई। लोग भीषण गर्मी में लयबद्ध तरीके से अपनी छाती पीट रहे थे। महिलाओं की चीखें शोर के बीच गूंज रही थीं। शोक मनाने वालों की भीड़ ताबूत की ओर दौड़ी, जिससे 86 वर्षीय धार्मिक नेता का सफेद कपड़े में लिपटा हुआ शरीर भीड़ में गिर गया। शुरुआती रिपोर्टों के अनुसार, इस अफरा-तफरी में कम से कम आठ लोगों की मौत हो गई और लगभग 11,000 अन्य घायल हो गए। ऐसी आशंका जताई जा रही है कि खामेनेई के अंतिम यात्रा के दौरान भी इसी तरह की भगदड़ मच सकती है। अगर भीड़ लाखों में हो।
अभी क्या है हालात?
जून में हुए अंतरिम समझौते ने ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए अंतिम समझौते की शर्तों पर बातचीत करने के लिए 60 दिनों की समय सीमा दिया। जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य के मुद्दे शामिल हैं। इस सप्ताह कतर में तकनीकी वार्ता शुरू हुई, लेकिन जलडमरूमध्य के भविष्य को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच गहरे मतभेदों और कई दिनों तक चली गोलीबारी के कारण यह वार्ता जटिल हो गई है।