फर्डिनैंड मार्कोस जूनियर के भारी बहुमत से राष्ट्रपति चुने जाने का मतलब यह समझा गया है कि अगले चार वर्ष तक फिलीपींस चीन को गले लगाने की नीति पर चलता रहेगा। ये नीति निवर्तमान राष्ट्रपति रोड्रिगो दुतेर्ते ने अपनाई थी। विश्लेषकों ने कहा है कि फिलीपींस के ताजा चुनाव नतीजे से एशिया-प्रशांत क्षेत्र के लिए अमेरिकी रणनीति के सामने नई चुनौती पैदा हो सकती है।
मार्कोस जूनियर देश के पूर्व तानाशाह फर्डिनैंड मार्कोस सीनियर के बेटे हैं। मार्कोस सीनियर को उनके दौर में लोकतंत्र और लोगों की आजादी के हुए क्रूर दमन के लिए याद किया जाता है। पर्यवेक्षकों ने कहा है कि जीत के बाद मार्कोस जूनियर ने यह संदेश देने की कोशिश की है कि उन्हें उनके पिता के दौर की अप्रिय यादों से न जोड़ा जाए। पर्यवेक्षकों के मुताबिक चुनाव अभियान के दौरान मार्कोस जूनियर ने ज्यादातर सार्वजनिक बहसों में भाग लेने से इनकार कर दिया। उनकी शासन नीति क्या होगी, इसको लेकर देश में भ्रम का माहौल है।
लेकिन चीन के मामले में उन्होंने निवर्तमान राष्ट्रपति दुतेर्ते की नीति का समर्थन किया है। दुतेर्ते ने कहा था कि चीन से अच्छे संबंध रखने के अलावा फिलीपींस के पास कोई और विकल्प नहीं है। मार्कोस जूनियर ने चुनाव अभियान के दौरान ही मनीला स्थित चीनी राजदूत हुआंग शिलियान से मुलाकात की थी। इसे उनकी विदेश नीति संबंधी प्राथमिकताओं का एक संकेत समझा गया।
फिलीपींस के चीन के साथ दक्षिण चीन सागर में समुद्री सीमा को लेकर विवाद है। 2016 में अंतरराष्ट्रीय पंचाट ने इस मामले में फिलीपींस के पक्ष में फैसला सुनाया था। लेकिन दुतेर्ते ने उस फैसले पर अमल के लिए जोर नहीं डाला। इस बीच वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम पर छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक दुतेर्ते के शासनकाल (2016-2021) में फिलीपींस में चीन के निवेश में उसके पहले के छह साल की तुलना में 12 गुना की बढ़ोतरी हुई।