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ऑस्ट्रेलिया में चुनावी माहौल गरमाया: पीएम मॉरिसन के लिए इस बार कड़ी चुनौती

Wed, 11 May 2022 04:03 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कैनबरा

सार

ऑस्ट्रेलियाई आम चुनाव का नतीजा आने के तीन दिन बाद ही अमेरिकी नेतृत्व वाले क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी डायलॉग (क्वैड) की शिखर बैठक होनी है। अगर मॉरिसन फिर जनादेश हासिल नहीं कर सके, तो उससे क्वैड की रणनीति को लेकर अनिश्चय पैदा हो सकता है। मॉरिसन ने क्वैड में ऑस्ट्रेलिया की सक्रिय भूमिका बनाए रखी है...
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स्कॉट मॉरिसन - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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ऑस्ट्रेलिया में आम चुनाव के लिए प्रचार अभियान अब अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है। दोनों प्रमुख पार्टियों के नेताओं- प्रधानमंत्री और लिबरल पार्टी के स्कॉट मॉरिसन और लेबर पार्टी के नेता एंथनी अल्बानीज के बीच टीवी पर आमने-सामने हुई बहस से चुनावी माहौल और गरमा गया है। हालांकि मीडिया सर्वेक्षणों से यह सामने आया कि टीवी बहस में कोई नेता दूसरे पर भारी नहीं पड़ा। लेकिन इससे चुनावी मुद्दों पर देश में चर्चा तेज हो गई है।

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ऑस्ट्रेलिया में 151 सदस्यों वाली संसद चुनने के लिए मतदान 21 मई को होगा। अब तक जारी हुए चुनाव पूर्व जनमत सर्वेक्षणों से माहौल लेबर पार्टी के पक्ष में होने का संकेत मिला है। लेकिन मीडिया रिपोर्टों में बताया गया है कि इस बार लेबर नेता अति आत्म-विश्वास से बच रहे हैं। तीन साल पहले हुए चुनाव में भी सर्वेक्षणों में लेबर पार्टी को आगे बताया गया था। लेकिन जब असल नतीजे आए, तो लेबर पार्टी को निराशा में डूबना पड़ा।

पूरी दुनिया की है नजर

ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा चुनाव पर पास-पड़ोस के देशों के अलावा बड़ी वैश्विक ताकतों की भी नजर है। इन चुनावों में चीन एक बड़ा मुद्दा बना हुआ है। प्रधानमंत्री मॉरिसन को चीन के खिलाफ सख्त रुख वाला नेता समझा जाता है। लेबर पार्टी को परंपरागत रूप चीन के प्रति नरम रुख रखने वाली पार्टी माना जाता है। लेकिन इस बार चुनाव अभियान में लेबर पार्टी ने भी चीन विरोधी तेवर दिखाए हैं। उसने आरोप लगाया है कि मॉरिसन की गलत नीतियों के कारण चीन को अपना प्रभाव बढ़ाने में मदद मिली है।

ऑस्ट्रेलियाई आम चुनाव का नतीजा आने के तीन दिन बाद ही अमेरिकी नेतृत्व वाले क्वाड्रैंगुलर सिक्योरिटी डायलॉग (क्वैड) की शिखर बैठक होनी है। अगर मॉरिसन फिर जनादेश हासिल नहीं कर सके, तो उससे क्वैड की रणनीति को लेकर अनिश्चय पैदा हो सकता है। मॉरिसन ने क्वैड में ऑस्ट्रेलिया की सक्रिय भूमिका बनाए रखी है।

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अखबार द गार्जियन के ऑस्ट्रेलियाई संस्करण के एक विश्लेषण में कहा गया है कि इस चुनाव में छोटी पार्टियों का प्रदर्शन निर्णायक साबित हो सकता है। मुमकिन है कि ये पार्टियां किंगमेकर की भूमिका में आ जाएं। इस विश्लेषण के मुताबिक इस बार अधिक संभावना यही है कि लेबर पार्टी सरकार बना लेगी। देखने की बात यह होगी कि उसे पूर्ण बहुमत मिलता है या वह छोटे दलों के समर्थन से गठबंधन सरकार बनाती है।

वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया प्रांत में फायदा

साल 2019 में हुए आम चुनाव में 151 सदस्यों वाले हाउस ऑफ रिप्रजेंटेटिव में लेबर पार्टी को 69 सीटें मिली थीं। लिबरल पार्टी के नेतृत्व वाले गठबंधन को 75 सीटें हासिल हुई थीं। लेबर पार्टी के अपने आकलन के मुताबिक इस बार वह पांच अधिक सीटें पाने के लिए आश्वस्त है। अगर नतीजा इसी रूप में आया, तो सरकार बनाने के लिए उसे किसी छोटे दल के समर्थन पर निर्भर रहना पड़ेगा।  

लेबर पार्टी को सबसे ज्यादा फायदा वेस्टर्न ऑस्ट्रेलिया प्रांत में होने संभावना है। चुनाव विश्लेषकों की नजर यह देखने पर टिकी है कि यहां होने वाले लगभग निश्चित नुकसान की भरपाई लिबरल पार्टी क्या किसी दूसरे राज्य में कर पाएगी।

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