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अमेरिका: सिखों के खिलाफ घृणा अपराध तीन गुना बढ़े, एफबीआई की रिपोर्ट में खुलासा

Wed, 13 Nov 2019 11:23 AM IST
योगेश साहू वर्ल्ड न्यूज, अमर उजाला, वॉशिंगटन
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प्रतीकात्मक तस्वीर
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अमेरिका में सिखों के खिलाफ घृणा अपराध (हेट क्राइम या नफरत भरे अपराध) तीन गुना तक बढ़े हैं। यह खुलासा केंद्रीय जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने अपनी रिपोर्ट में किया है। इसके मुताबिक बीते एक साल में अमेरिका में घृणा अपराध का आंकड़ा पिछले 16 सालों के सबसे ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है।

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अमेरिका की केंद्रीय जांच एजेंसी ने 2018 में हेट क्राइम के आंकड़े जारी किए हैं। एफबीआई के मुताबिक, एक साल में लैटिन मूल के लोगों के खिलाफ सबसे ज्यादा हेट क्राइम की वारदातें हुई हैं। वहीं मुस्लिम, यहूदी और सिख भी बड़ी संख्या में इसके शिकार बने हैं। साल 2017 से 2018 के बीच सिखों के खिलाफ नफरत भरे आपराधिक मामले तीन गुना तक बढ़े हैं।


इस समुदाय के साथ सबसे ज्यादा घृणा अपराध

एफबीआई की घृणा अपराधों से जुड़ी वार्षिक रिपोर्ट के मुताबिक, साल 2017 में सिखों के खिलाफ ऐसी 20 वारदातें सामने आई थीं। जबकि साल 2018 में यह संख्या बढ़कर 60 तक पहुंच गई। हालांकि ऐसी सबसे ज्यादा वारदातें यहूदियों (56.9 फीसदी) और मुस्लिमों (14.6 फीसदी) के साथ घटित हुईं।

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इनके बाद तीसरे नंबर पर सिखों (4.3 फीसदी) के साथ वारदातों को अंजाम दिया गया। लैटिन अमेरिकियों के साथ वारदातों के साल 2017 में 430 मामले सामने आए थे, जबकि साल 2018 में ऐसे 485 मामले सामने आए। इस दौरान मुस्लिम और अरब मूल के लोगों के साथ घृणा अपराध की 270 वारदातें घटीं।

व्यक्तिगत घृणा अपराध की घटनाएं बढ़ीं

रिपोर्ट के अनुसार साल 2017 के मुकाबले 2018 में घृणा अपराध की वारदातों में मामूली कमी आई। यह 7175 से घटकर 7120 पहुंच गई। इससे पहले साल 2016 से 2017 के बीच घृणा अपराध करीब 17 फीसदी तक बढ़ा था।

इस बार संपत्ति के खिलाफ अपराध में कमी आई, वहीं लोगों पर व्यक्तिगत हमले की वारदातें बढ़ी हैं। कुल 7120 घृणा अपराध की वारदातों में से 4571 (61 फीसदी) किसी व्यक्ति के खिलाफ हुईं।
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ट्रंप के बयान और सरकार की नीतियां

अमेरिका में घृणा अपराध बढ़ने का एक बड़ा कारण राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों और उनकी सरकार की नीतियों को माना जा रहा है। ब्रिटिश अखबार द गार्जियन के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन ने बीते कुछ समय में अप्रवासियों और शरणार्थियों को देश से बाहर भेजने को लेकर बयान दिए हैं।

सरकार की नीतियां भी इसी दिशा में हैं। ट्रंप प्रशासन ने एलजीबीटी (लेस्बियन, गे, बाइसेक्शुअल और ट्रांसजेंडर) समुदाय के खिलाफ नीतियों को भी आगे बढ़ाया है। इसी के तहत कुछ समय पहले सेना में ट्रांसजेंडरों की भर्ती पर रोक का फैसला लिया गया था।
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