ये जानना वाकई दिलचस्प है कि जन्म होने के पहले से और जीवन का अंत होने तक, नृत्य, गायन या पेंटिंग जैसी गतिविधियों से हमारे स्वास्थ्य पर सकारात्मक असर पड़ता है। इस आर्ट थैरेपी यानी कला के विभिन्न रूपों द्वारा किए जाने वाले उपचार पारंपरिक तरीकों से भी ज्यादा किफायती साबित हो सकते हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने सोमवार को जारी एक ताजा रिपोर्ट में कला और सांस्कृतिक गतिविधियों में हिस्सा लेने से स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभाव पर एक रिपोर्ट जारी की है।
रिपोर्ट तैयार करने के लिए 900 से ज्यादा प्रकाशनों का आकलन करने और यह समझने का प्रयास किया गया है कि कला किस तरह शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य में बेहतरी लाने में मददगार साबित हो सकती है।
यह पहली बार है जब इतने व्यापक पैमाने पर ऐसी समीक्षा तैयार की गई है। रिपोर्ट में कला को पांच श्रेणियों में विभाजित करते हुए उनमें हिस्सा लेने से होने वाले शारीरिक लाभ की समीक्षा की गई है।
ये पांच श्रेणियां इस प्रकार हैं: प्रदर्शन कला (संगीत, नृत्य, गायन, थिएटर, फिल्म), दृश्य कला (शिल्प, डिजायन, पेंटिंग,फोटोग्राफ़ी); साहित्य (लेखन, पाठन, साहित्यिक समारोहों में शिरकत); संस्कृति (संग्रहालयों, कला- दीर्घाओं, संगीत समारोहों, थिएटर में जाना); ऑनलाइन कला (एनीमेशन व डिजिटल कला)।
योरोप में यूएन स्वास्थ्य एजेंसी के क्षेत्रीय निदेशक पिरोसका ओस्तलिन ने सोमवार को एक प्रेस वक्तव्य में कहा कि इस अध्ययन में जो उदाहरण शामिल किए गए हैं उनसे स्वास्थ्य व कल्याण को समाज और समुदाय के विस्तृत परिप्रेक्ष्य में समझने में मदद मिलती है।
इसके अलावा कुछ मुश्किलों के समाधान भी प्रस्तुत किए गए हैं जो अब तक सामान्य चिकित्सा तरीकों के जरिए नहीं मिल पा रहे थे।
रिपोर्ट के मुताबिक विविध प्रकार के सांस्कृतिक और कला के अवसरों से जुड़ने से मनोवैज्ञानिक, दैहिक, सामाजिक और व्यावहारिक असर पड़ता है जिसके नतीजे स्वास्थ्य पर देखने को मिलते हैं।