FBI raids Trump: Former US President Donald Trump
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अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के फ्लोरिडा राज्य में मार-ए-लेगो स्थित आवास पर मारे गए छापे में एफबीआई को जो दस्तावेज मिले, उससे अमेरिका पूर्व राष्ट्रपति की राजनीतिक महत्त्वाकांक्षाएं ध्वस्त हो सकती हैं। अमेरिका की प्रमुख जांच एजेंसी फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (एफबीआई) ने यह छापा बीते सोमवार को मारा था। अमेरिकी मीडिया में छप रहे ब्योरे के मुताबिक छापे के दौरान संगीन दस्तावेज बरामद हुए। ये दस्तावेज राष्ट्रपति पद छोड़ने के समय ट्रंप व्हाइट हाउस से अपने साथ ले गए थे।
अब सामने आई जानकारी के मुताबिक एफबीआई ने ट्रंप के आवास पर छापा जासूसी कानून के तहत मारा। इस कानून का इसके पहले इस्तेमाल गोपनीय दस्तावेजों को लीक करने के आरोपी लोगों के खिलाफ हुआ है। उन लोगों में वेबसाइट विकीलिक्स के संस्थापक जुलियन असांज और कुछ दूसरे व्हिसलब्लोअर शामित हैं। अखबार द गार्जियन में छपी एक रिपोर्ट के मुताबिक एफबीआई ने छापा मारने और जब्ती करने का वारंट हासिल किया था, जिसे अभी तक सीलबंद रखा गया है। वारंट संहिता के मुताबिक ट्रंप पर अगर आरोप साबित हुए, तो उन्हें दस साल तक कैद सुनाई जा सकती है।
ट्रंप 2024 का राष्ट्रपति चुनाव लड़ने की तैयारियों में जुटे हुए हैं। अटकलें रही हैं कि वे अब किसी भी दिन अपनी उम्मीदवारी का एलान कर सकते हैं। उनके समर्थकों का आरोप है कि इसे देखते हुए ही जो बाइडन प्रशासन ने छापा डलवाया। ट्रंप आज भी अमेरिका में बेहद लोकप्रिय हैं। उनके समर्थकों के मुताबिक उनकी लोकप्रियता से डरी सत्ताधारी डेमोक्रेटिक पार्टी ने अब गोपनीय दस्तावेज के मामले में फंसा कर पूर्व राष्ट्रपति को चुनाव लड़ने से रोकने की कोशिश की है।
मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक ट्रंप के घर से मिले दस्तावेज टॉप सीक्रेट (पूर्ण गोपनीय) श्रेणी में आते हैँ। कुछ खबरों में कहा गया है कि उनमें से कुछ दस्तावेजों का संबंध अमेरिका के परमाणु हथियार कमांड से है। हालांकि इस बात की पुष्टि नहीं हुई है। द गार्जियन के मुताबिक कुल पांच श्रेणी के दस्तावेज मिले हैं, जिनमें तीन सीक्रेट और बाकी कॉन्फिडेंशियल श्रेणी में आते हैं।
बताया जाता है कि ट्रंप जब व्हाइट हाउस से गए, तो उसके बाद वहां पाया गया कि दस्तावेजों के 15 बक्से गायब हैं। उनमें से कई दस्तावेज अब बरामद किए गए हैं। लेकिन ट्रंप समर्थकों ने इस संबंध में दो तरह के तर्क दिए हैं। उनका कहना है कि कथित रूप से जो संवेदनशील दस्तावेज बरामद हुए हैं, उन्हें एफबीआई ने खुद अपने साथ ले जाकर ट्रंप आवास में रख दिया था। उनकी दूसरी दलील यह है कि जिन दस्तावेजों को बरामद करने की बात कही जा रही है, उन्हें ट्रंप ने राष्ट्रपति रहते हुए ही डि-क्लासीफाइड (गोपनीयता श्रेणी से मुक्त) कर दिया था।
लेकिन अमेरिका के लिबरल मीडिया में छपी कानूनी राय के मुताबिक ये दोनों दलीलें कोर्ट में नहीं टिकेंगी। ट्रंप के बचाव पक्ष के लिए इन दोनों बातों को साबित करना नामुमकिन होगा। समझा जाता है कि बाइडन प्रशासन इस मामले में अब सुनवाई प्रक्रिया को तेज करने के प्रयास में जुट गया है।