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Fact Check: क्या नजरबंद हैं शी जिनपिंग? सोशल मीडिया पर अटकलों को अंबार; नए राष्ट्रपति की नियुक्ति का भी दावा

Sat, 24 Sep 2022 10:07 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग

सार

ना केवल स्वामी बल्कि चीन के भी कई नागरिकों ने ट्वीटर पर हैशटैग #XiJinping के साथ चीनी राष्ट्रपति की कथित नजरबंदी के बारे में पोस्ट किए। इतना ही नहीं, कई इंटरनेट यूजर्स ने तो ये भी दावा किया कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने सत्ता पर नियंत्रण कर लिया है।
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शी जिनपिंग - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर आज दिनभर चीन के राष्ट्रपति के बारे में अटकलें लगती रहीं। यूजर्स दावा करते रहे कि चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग को नजरबंद कर लिया गया है। इतना ही नहीं तमाम लोगों ने यह भी कहा कि उन्हें सेना अध्यक्ष के पद से पहले ही हटा दिया गया था। भाजपा के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने भी इस संबंध में ट्वीट किया था जिसके बाद ये सनसनी और फैल गई। हैशटैग #XiJinping के साथ ही चीन और उसकी सेना से जुड़े हैशटैग ट्विटर पर ट्रेंड होते रहे। हालांकि, चीन सरकार या चीनी सरकारी मीडिया ने इस बारे में कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है। 

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दिन भर रहा अटकलों का बाजार गर्म
सुब्रमण्यम स्वामी ने ट्वीट कर कहा कि 'सोशल मीडिया पर जो अफवाह फैलाई जा रही है उसकी जांच किए जाने की आवश्यकता है। क्या शी जिनपिंग बीजिंग में नजरबंद हैं? कहा जा रहा है कि जब शी हाल ही में समरकंद में थे, तब चीनी कम्युनिस्ट पार्टी के नेताओं ने उन्हें सेना के अध्यक्ष पद से हटा दिया था। फिर उन्हें नजरबंद किया गया। सोशल मीडिया पर इस तरह की अफवाह है, जिसकी जांच की जानी चाहिए।'

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जनरल Li Qiaoming को नया राष्ट्रपति बनाए जाने का दावा
ना केवल स्वामी बल्कि चीन के भी कई नागरिकों ने ट्वीटर पर हैशटैग #XiJinping के साथ चीनी राष्ट्रपति की कथित नजरबंदी के बारे में पोस्ट किए। इतना ही नहीं, कई इंटरनेट यूजर्स ने तो ये भी दावा किया कि पीपल्स लिबरेशन आर्मी ने सत्ता पर नियंत्रण कर लिया है। वहीं, कुछ लोगों ने तो ये भी कहा कि पीएलए ने जनरल Li Qiaoming को चीन का राष्ट्रपति बना दिया गया है। 


बीजिंग में सेना के जुलूस के वीडियो भी किए गए शेयर
एक यूजर जेनिफर जेंग ने चीन के वीडियो पोस्ट किए हैं, जिसमें देखा जा सकता है कि सेना की कई गाडियां बीजिंग में चक्कर लगा रही हैं। इन वीडियो में दावा किया गया कि सेना के वाहनों का करीब 80 किलोमीटर लंबा जुलूस निकाला गया। ये जुलूस बीजिंग के पास हुआनलाई काउंटी से शुरू होकर हेबेई प्रांत के झांगजियाकौ शहर में समाप्त हुआ। जेनिफर ने अपने पोस्ट में लिखा कि अफवाह है कि CCP के वरिष्ठों द्वारा जिनपिंह को PLA के प्रमुख के पद से हटाने के बाद गिरफ्तार कर लिया है।  



सेंट्रल गार्ड ब्यूरो से जिनपिंग ने खोया नियंत्रण
वहीं, न्यूज हाइलैंड विजन ने अपनी एक रिपोर्ट में चौंकाने वाला खुलासा किया है। उसका कहना है कि पूर्व चीनी राष्ट्रपति हू जिंताओ और पूर्व चीनी प्रधानमंत्री वेन जिबाओ ने सोंग पिंग के कंट्रोल वाली सेंट्रल गार्ड ब्यूरो को अपने पक्ष में कर लिया है। जैसे ही इन दोनों नेताओं ने सीजीबी का नियंत्रण वापस ले लिया, इसकी जानकारी जियांग जेंग और बीजिंग में केंद्रीय समिति के सदस्यों को फोन के माध्यम से दी गई। इसकी जानकारी मिलते ही मूल स्थायी समिति के सदस्यों ने उसी क्षण शी के सैन्य अधिकार को समाप्त कर दिया। वहीं, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग को 16 सितंबर की शाम को इसकी जानकारी मिली तो वे फौरन बीजिंग लौट आए। हालांकि, शी जिनपिंग को हवाई अड्डे पर हिरासत में लिया गया था और संभवत: वर्तमान में झोंगनानहाई के घर में नजरबंद किया गया है। गौरतलब है कि सीजीबी का उद्देश्य पोलित ब्यूरो स्थायी समिति के सदस्यों और अन्य सीसीपी नेताओं को सुरक्षा प्रदान करना है। सीजीबी शी जिनपिंग की सुरक्षा के लिए भी जिम्मेदार है।
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कई लोगों को जिनपिंग के शासनकाल में मिली है सजा
हाल में आईं चीनी मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, हाल ही में चीन में दो पूर्व मंत्रियों के साथ ही कुछ सुरक्षा अधिकारियों को उम्रकैद के साथ ही मौत की सजा सुनाई गई है। चीनी मीडिया के मुताबिक, जिन लोगों को वहां सजा दी गई वे चीनी राष्ट्रपति के विरोधी गुट से संबंध रखते थे।  चीन में साल 2012 में सत्ता में आने के बाद राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने भ्रष्टाचार के खिलाफ अभियान शुरू किया था। उनके इस अभियान के क्रम में तब से दर्जनों शीर्ष सैन्य अधिकारियों सहित दस लाख से अधिक अधिकारियों को दंडित किया गया है। इसे लेकर चीन के लोगों में भी नाराजगी थी। कहा जा रहा है कि जिनपिंग अपने विरोधियों को समाप्त कर रहे हैं।

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