सिंगापुर के पीएम लॉरेंस वोंग
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सिंगापुर में नेताओं को इतनी ज्यादा सैलरी क्यों?
सिंगापुर सरकार लंबे समय से राजनीतिक नेताओं को ज्यादा वेतन देने के पीछे कई तर्क देती रही है। उसका कहना है कि ऊंची सैलरी से निजी क्षेत्र के सक्षम लोगों को सार्वजनिक सेवा में आने के लिए आकर्षित किया जा सकता है। साथ ही इससे अच्छे प्रशासन को बनाए रखने और भ्रष्टाचार के लिए प्रोत्साहन कम करने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, सिंगापुर में नेताओं की ऊंची सैलरी हमेशा से संवेदनशील मुद्दा रही है। आम लोगों की कमाई और राजनीतिक नेताओं के वेतन में बड़ा अंतर होने के कारण इस पर चर्चा होती रही है।
2025 में सिंगापुर की मध्य मासिक आय 5,775 सिंगापुर डॉलर थी। ऐसे में राजनीतिक नेताओं को मिलने वाला वेतन आम लोगों की आय की तुलना में काफी ज्यादा है। प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग ने अपनी सैलरी में हुई पूरी बढ़ोतरी को अपने कार्यकाल के अगले पांच साल तक अच्छे कार्यों के लिए दान करने की बात कही है।
सिंगापुर में इससे पहले कब बढ़ी थी सैलरी?
न्यूज एजेंसी रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, सिंगापुर में राजनीतिक नेताओं की सैलरी में इससे पहले 2012 में बदलाव किया गया था। उस समय मंत्रियों की सैलरी में 36 फीसदी कटौती की गई थी। इसका मकसद सार्वजनिक असंतोष को दूर करना था।
इसके बाद 2017 में भी वेतन की समीक्षा हुई, लेकिन सैलरी बढ़ाने का फैसला नहीं लिया गया। 2023 में होने वाली समीक्षा को आर्थिक अनिश्चितता के कारण टाल दिया गया था। अब 2026 की समीक्षा के बाद राजनीतिक नेताओं के वेतन में बढ़ोतरी की गई है।
दुनिया के दूसरे बड़े नेताओं की सैलरी कितनी है?
पॉलिटिकल सैलरीस के आंकड़ों के अनुसार हांगकांग के चीफ एग्जीक्यूटिव जॉन ली की सालाना सैलरी करीब 7.19 लाख डॉलर यानी लगभग 6.8 करोड़ रुपये है। हांगकांग चीन का विशेष प्रशासनिक क्षेत्र है, इसलिए यह स्वतंत्र देश नहीं है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नेताओं की सैलरी की तुलना में इसे शामिल किया जाता है।
स्विट्जरलैंड के राष्ट्रपति गाय पार्मेलिन की सालाना सैलरी करीब 6.06 लाख डॉलर यानी लगभग 5.75 करोड़ रुपये है। स्विट्जरलैंड में राष्ट्रपति का कार्यकाल एक साल का होता है और राष्ट्रपति का चुनाव सात सदस्यीय फेडरल काउंसिल में से किया जाता है।
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को सालाना चार लाख डॉलर यानी करीब 3.8 करोड़ रुपये मिलते हैं। यह राष्ट्रपति की बेस सैलरी है। इसके अलावा राष्ट्रपति को 50 हजार डॉलर का खर्च भत्ता और यात्रा व मनोरंजन से जुड़े भत्ते भी मिलते हैं।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की बेस सैलरी करीब 22 हजार डॉलर यानी लगभग 20.9 लाख रुपये सालाना है। 2015 में चीन में राष्ट्रपति समेत छह अन्य वरिष्ठ कम्युनिस्ट पार्टी अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों की बेस सैलरी में 62 फीसदी बढ़ोतरी की गई थी।
भारत के प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति को कितना वेतन मिलता है?
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को करीब 2.33 लाख रुपये प्रति माह, यानी लगभग 27.96 लाख रुपये सालाना मिलते हैं। इसमें ₹1 लाख मासिक वेतन, ₹70 हजार निर्वाचन क्षेत्र भत्ता, ₹60 हजार कार्यालय खर्च भत्ता और ₹3 हजार प्रधानमंत्री का सत्कार भत्ता शामिल है। कार्यालय खर्च भत्ते के ₹60 हजार में ₹20 हजार ऑफिस खर्च और ₹40 हजार सचिवीय सहायता के लिए हैं। इसके अलावा ₹2,000 प्रतिदिन का दैनिक भत्ता अलग से मिलता है। प्रधानमंत्री को आधिकारिक आवास और सुरक्षा समेत दूसरी सुविधाएं भी मिलती हैं।
भारत की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को हर महीने 5 लाख रुपये वेतन मिलता है। यानी उनकी सालाना सैलरी 60 लाख रुपये है। राष्ट्रपति का वेतन राष्ट्रपति के परिलब्धियां और पेंशन अधिनियम, 1951 के तहत तय होता है।
पड़ोसी देशों के नेताओं की कितनी सैलरी?
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ की मासिक सैलरी करीब 5.5 लाख पाकिस्तानी रुपये है। उनकी सालाना सैलरी 60 लाख पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा है। इसके अलावा उन्हें आधिकारिक आवास, वाहन, सुरक्षा और प्रधानमंत्री आवास से जुड़े खर्च जैसी सुविधाएं मिलती हैं।
- मालदीव के राष्ट्रपति मोहम्मद मुइज्जू की सालाना सैलरी 93,100 डॉलर यानी करीब 88.3 लाख रुपये है।
- भूटान के प्रधानमंत्री शेरिंग टोबगे की सालाना सैलरी 24,300 डॉलर यानी करीब 23 लाख रुपये है।
- बांग्लादेश के राष्ट्रपति मिर्जा फखरुल इस्लाम आलमगीर की सालाना सैलरी 11,700 डॉलर यानी करीब 11.1 लाख रुपये है।
- वहीं श्रीलंका की प्रधानमंत्री हरिनी अमरसूर्या की सालाना सैलरी 3,500 डॉलर यानी करीब 3.3 लाख रुपये है।