किशोरों के दिमाग भी ऐसे बने हैं कि वे सामाजिक तौर पर जुड़े रहना चाहते हैं। सोशल मीडिया इसका अवसर देता है। यहां न केवल संपर्क, बल्कि लाइक्स व प्रतिक्रियाएं भी मिलती हैं।
अमेरिका के 50 में से 41 राज्यों ने अपने बच्चों को सोशल मीडिया की लत से बचाने के लिए फेसबुक, इंस्टाग्राम, व्हाट्सएप की मालिकाना कंपनी मेटा प्लेटफॉर्म्स के खिलाफ केस दायर कर दिया है। आरोप हैं कि मेटा ने जानबूझ कर ऐसे फीचर्स डिजाइन किए जो बच्चों व किशोरों को इसकी लत लगा रहे हैं। बड़े भी इससे बच नहीं पा रहे हैं। मेटा उनकी कमजोरी का अपने मुनाफे के लिए फायदा उठा रही है। क्या सच में सोशल मीडिया व इंटरनेट की लत लगती है और किशोरों के दिमाग की मजबूरी का मेटा फायदा उठा रही है? इन सवालों के जवाब देती रिपोर्ट -
किशोरों की जरूरत : सामाजिक संपर्क
इनाम का लालच
कनेक्टिकट में इंटरनेट व तकनीक की लत के पीड़ितों के लिए केंद्र चला रहे मनोचिकित्सक डेविड ग्रीनफील्ड मेटा जैसी कंपनियों की शक्तिशाली तकनीक 'इंटरमिटन री-इन्फोर्समेंट' के बारे में बताते हैं। यह यूजर्स को बताती है कि पोस्ट किए गए कमेंट्स, तस्वीरों, वीडियो के लिए उन्हें दूसरे लोगों से लाइक्स व प्रतिक्रियाएं मिलेंगी, जो उनका इनाम होंगी, लेकिन कब, यह तय नहीं होता। यह इनाम का लालच ही लत लगाता है। यह कुछ-कुछ जुआ घर में लगी मशीनों जैसा है, जिनमें रंग-बिरंगी लाइटें होती हैं, संगीत बजता है और 'कुछ पाने की संभावना' यानी इनाम का लालच होता है। यह तकनीक यूजर्स को सोशल मीडिया से चिपकाए रहती है। इससे बड़े तक नहीं बच पाते, बच्चे व किशोर तो ज्यादा जोखिम में हैं।
इसे लत कहना सही
इंटरनेट सामग्री मादक पदार्थ जैसी
डॉ. रिच से डॉ. ग्रीनफील्ड पूरी तरह सहमत नहीं होते। वह बताते हैं कि कई मामलों में सोशल मीडिया व इंटरनेट की वजह से बच्चों की पढ़ाई, स्कूल, नींद तक प्रभावित हो रही है।