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कर्ज संकट: अब श्रीलंका के सामने डिफॉल्ट करने के अलावा कोई रास्ता नहीं?

Tue, 18 Jan 2022 03:49 PM IST
Harendra Chaudhary वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कोलंबो

सार

जानकारों का कहना है कि श्रीलंका के सामने डिफॉल्ट करने की गंभीर स्थितियां हैं। बीते हफ्ते रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने श्रीलंका की कर्ज रेटिंग को सीसीसी+ से घटाकर सीसीसी कर दिया। यानी श्रीलंका के प्रति अपने नजरिए को नकारात्मक कर दिया। विश्लेषकों के मुताबिक अगर श्रीलंका ने डिफॉल्ट किया, तो उसके दर्जे में और गिरावट तय है...
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गोतबया राजपक्षे - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार
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श्रीलंका के बड़े अर्थशास्त्रियों और कारोबारियों ने राष्ट्रपति गोतबया राजपक्षे की सरकार से अनुरोध किया है कि अगले हफ्ते कर्ज चुकाने के मामले में वह डिफॉल्ट हो जाने दे। यानी अगले हफ्ते कर्ज के जिस हिस्से और ब्याज का भुगतान करना है, वह वैसा ना करे। इन अर्थशास्त्रियों और कारोबारियों का कहना है कि देश में पहली जरूरत ईंधन, खाद्य सामग्रियों, दवाओं और दूसरी जरूरी चीजों की सप्लाई जारी रखने की है। उनके मुताबिक देश के पास जो विदेशी मुद्रा है, उसे कर्ज चुकाने के बजाय इन चीजों की खरीदारी पर खर्च करना सही नीति होगी।

कर्ज की रेटिंग घटी

जानकारों का कहना है कि श्रीलंका के सामने डिफॉल्ट करने की गंभीर स्थितियां हैं। बीते हफ्ते रेटिंग एजेंसी एसएंडपी ने श्रीलंका की कर्ज रेटिंग को सीसीसी+ से घटाकर सीसीसी कर दिया। यानी श्रीलंका के प्रति अपने नजरिए को नकारात्मक कर दिया। विश्लेषकों के मुताबिक अगर श्रीलंका ने डिफॉल्ट किया, तो उसके दर्जे में और गिरावट तय है।

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श्रीलंका के सेंट्रल बैंक के गवर्नर अजित निवार्ड कैबराल ने हाल में बताया था कि श्रीलंका को 18 जनवरी को 50 करोड़ डॉलर के अंतरराष्ट्रीय सॉवरेन बॉन्ड मैच्योर हो जाएंगे। यानी तब इतनी रकम श्रीलंका सरकार को उन देशों को देनी होगी, जिन्होंने उसके बॉन्ड खरीदे थे। अब कई अर्थशास्त्रियों ने सलाह दी है कि श्रीलंका सरकार इस समयसीमा को बिना रकम चुकाए गुजर जाने दे।

विश्व बैंक के पूर्व मुख्य अर्थशास्त्री शांता देवराजन ने कहा है कि श्रीलंका का विदेशी मुद्रा का संकट रोज अधिक गंभीर होता जा रहा है। इधर देश में रसोई गैस, खाद्य सामग्रियों, दूध के पाउडर आदि जैसी चीजों की भारी किल्लत है। उन्होंने कहा कि अभी 50 करोड़ डॉलर की रकम लोगों के लिए खाद्य और दूसरी जरूरी चीजों को उपलब्ध कराने के लिए खर्च करने की जरूरत है। देवराजन ने श्रीलंकाई अखबार डेली एफटी में लिखे एक लेख में कहा है कि बॉन्डधारी देश वैसी गरीबी में नहीं हैं, जैसी इस समय श्रीलंका की एक बड़ी आबादी झेल रही है।

जरूरी सामान पर खर्च हो विदेशी मुद्रा

व्यापारियों की संस्था सिलोन चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष विश गोविंदासामी ने भी देवराजन की राय का समर्थन किया है। अखबार डेली फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत में उन्होंने कहा कि सरकार को ऐसा रास्ता ढूंढना चाहिए, जिससे कर्ज चुकाने की समयसारणी फिर से तय करना संभव हो जाए। अभी विदेशी मुद्रा को जरूरी चीजों की खरीदारी पर खर्च करना चाहिए, जिससे मुश्किल में फंसे श्रीलंकाई नागरिकों को राहत मिल सके।

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इस बीच रेटिंग एजेंसी फिच ने कहा है कि श्रीलंका को इस साल की पहली तिमाही में ही कर्ज चुकाने के लिए तीन बिलियन डॉलर की विदेशी मुद्रा की जरूरत होगी। एजेंसी अपने एक आकलन में बताया है कि बीते दिसंबर में श्रीलंका ने चीन के साथ डेढ़ बिलियन डॉलर की मुद्रा अदला-बदली (करेंसी स्वैप) की थी, जिससे उसे फौरी राहत मिली। लेकिन ये राहत काफी नहीं है।

सेंट्रल बैंक ऑफ श्रीलंका के पूर्व डिप्टी गवर्नर ए विजेवरदेना के मुताबिक आज श्रीलंका की हालत दोधारी तलवार की तरह हो गई है। वेबसाइट निक्कईएशिया.कॉम से बातचीत में उन्होंने कहा- इस हालत को ठीक नहीं संभाला गया, तो यह सबके लिए घातक होगा। उन्होंने कहा- अब तक कर्ज चुकाने के मामले में श्रीलंका का रिकॉर्ड बेदाग रहा है। लेकिन मौजूदा हालत में जब विदेशी मुद्रा भंडार खाली हो गया है, तब वह अपने इस रिकॉर्ड को बचाए नहीं रख सकता।

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