भारत और पाकिस्तान के बीच संघर्ष विराम करार को सही कदम करार देते हुए विशेषज्ञों ने इसका स्वागत किया। हालांकि साथ ही सीमा पार से होने वाले आतंकी घुसपैठ के प्रति आगाह भी किया।
विशेषज्ञों ने कहा, पड़ोसी देश से आ रहे आतंकवाद को रोकने के लिए सेना को सतर्क रहने की जरूरत है। सेना की ओर से भी बृहस्पतिवार को कहा गया था कि अंतरराष्ट्रीय सीमा पर घुसपैठ रोकने के लिए उसकी तैयारियों और चौकसी पर इस करार का कोई असर नहीं होगा।
लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त सतीश दुआ ने कहा, संघर्ष विराम स्वागत योग्य है और उस पर साझा बयान अपने आप में खास क्योंकि आमतौर पर ऐसा कम ही होता है। यह करार गर्मियों की शुरुआत में हुआ, इस मौसम में घुसपैठ बढ़ते हैं। हर बार गर्मियों में सीमा पार से गोलीबारी और घुसपैठ में इजाफा होता है। इसलिए गर्मियां शुरू होने से पहले ही संघर्ष विराम को लेकर करार होना कई मायनों में सकारात्मक है।
दुआ ने कहा, यह करार तीन पहलुओं से अहम है। पहला अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के हटने के बाद सीमापार से गोलीबारी बढ़ी थी। दूसरा दोनों देशों से उच्च आयुक्तों की वापसी के बाद कूटनीतिक रिश्ते प्रभावित हुए थे और तीसरा आतंकवाद का समर्थन बंद करने तक पाकिस्तान से बातचीत से भारत का इनकार करना। इन तीनों स्थितियों के बीच संघर्ष विराम को लेकर हुए करार के सकारात्मक संकेत मिलेंगे।
पाकिस्तान पर नजर रखनी होगी
सर्जिकल स्ट्राइक के दौरान सेना के उत्तरी कमांडर रहे लेफ्टिनेंट जनरल सेवानिवृत्त डीएस हूडा ने कहा, अभी प्रतीक्षा करने और चीजों को देखने का वक्त है। हमें पाकिस्तान की ओर से सीमा पर हर गतिविधि पर नजर रखनी होगी। अगर वह अब भी आतंकियों को भेजता रहा तो संघर्ष विराम करार का कोई मतलब नहीं रह जाएगा।
पाकिस्तान की जरूरत है यह करार
हूडा ने कहा, वैश्विक स्तर पर पाकिस्तान को कश्मीर का मुद्दा उठाने में हर बार मुंह की खानी पड़ी है। इसके अलावा सऊदी अरब और यूएई के साथ पाकिस्तान के रिश्तों में खटास है और उसकी आर्थिक स्थिति भी ठीक नहीं है। ऐसे में पाकिस्तान का यह करार उसकी जरूरत भी है। उधर चीन के साथ संघर्ष में भारत की स्थिति ने भी पाकिस्तान की चिंताएं बढ़ाई होेंगी इसीलिए संघर्ष विराम को लेकर सामने से पहल हुई है।