रूस और यूक्रेन के बीच जारी संघर्ष अब अपने पांचवे साल में प्रवेश कर रहा है। इसके बाद भी इस संघर्ष के खत्म होने की संभावनाएं कम दिख रही है। इसका बड़ा कारण शांति समझौते पर दोनों देशों का अलग-अलग और सख्त रुख है। इसी बीच इस संघर्ष की चौथी बरसी पर यूरोपीय नेता कीव के दौरे पर पहुंचे। आइए जानते हैं इस दौरान जेलेंस्की ने क्या कहा?
रूस और यूक्रेन के बीच जारी भयावह संघर्ष की चौथी बरसी पर मंगलवार को यूरोप के एक दर्जन से ज्यादा वरिष्ठ नेता यूक्रेन की राजधानी कीव पहुंचे। उनका यह दौरा यूक्रेन के प्रति समर्थन दिखाने के लिए था। यह युद्ध चार साल पहले शुरू हुआ था और अब तक इसमें दसियों हजार लोगों की जान जा चुकी है। इस संघर्ष ने पूरे यूरोप को चिंता में डाल रखा है कि रूस की मंशा आखिर कितनी बड़ी है। इस दौरान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने कहा कि उनका देश रूस की बड़ी और बेहतर हथियारों से लैस सेना का डटकर सामना कर रहा है।
यूरोपीय नेताओं को किस बात का डर?
इस संघर्ष को लेकर यूरोपीय नेताओं को डर है कि अगर रूस को नहीं रोका गया तो उसका असर पूरे महाद्वीप की सुरक्षा पर पड़ेगा। जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने कहा कि पिछले चार साल यूक्रेन और पूरे यूरोप के लिए एक बुरे सपने जैसे रहे हैं। उन्होंने कहा कि युद्ध फिर से यूरोप में लौट आया है और इसे खत्म करने के लिए हमें एकजुट और मजबूत रहना होगा। कीव पहुंचे नेताओं में यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष एंटोनियो कोस्टा, यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन और फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब भी शामिल थे। इसके अलावा सात देशों के प्रधानमंत्री और तीन विदेश मंत्री भी वहां पहुंचे।
यूक्रेन अपनी लड़ाई को जारी रखने के लिए विदेशी मदद पर काफी हद तक निर्भर है। नाटो देशों ने उसे सैन्य सहायता दी है। रूस को उत्तर कोरिया, ईरान और चीन जैसे देशों से मदद मिलने की भी बात कही जा रही है। इस युद्ध का असर दुनिया के कई देशों पर पड़ा है। खाद्यान्न की कमी, महंगाई और राजनीतिक अस्थिरता जैसी समस्याएं भी बढ़ी हैं।
ये भी पढ़ें:- Parliamentary Friendship Groups: स्पीकर बिरला बनाए 60+ देशों के समूह, सरकार बोली- विदेश नीति को मिलेगी मजबूती