यूरोप के पांच प्रमुख सैन्य व्ययकर्ता देशों के रक्षा मंत्रियों ने सोमवार को वारसॉ में अपने देशों के रक्षा खर्चा को बढ़ाने और डोनाल्ड ट्रंप में जीत के बाद शुरू किए गए नए प्रारूप पर चर्चा करने के लिए बैठक की। इसी सिलसिले रक्षा मंत्रियों ने सोमवार को कहा कि वे अपने रक्षा खर्च को बढ़ाना जारी रखना चाहते हैं, लेकिन अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के चुनौतीपूर्ण प्रस्तावों का सामना करना उनके लिए कठिन हो सकता है।
बता दें कि ट्रंप ने नाटो सहयोगियों से आग्रह किया था कि वे अपने रक्षा खर्च को अपने सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 5 प्रतिशत तक बढ़ा दें, जो कि अभी तक किसी भी नाटो सदस्य देश ने नहीं किया है। हालांकि पोलैंड जैसे देश जो 4 प्रतिशत खर्च कर रहे हैं वो भी इसे हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।
इन मुद्दों में हुई चर्चा
इस बैठक में मुख्य रूप से जर्मनी, फ्रांस, ब्रिटेन, इटली और पोलैंड के रक्षा मंत्री वारसॉ में एक नई बैठक में शामिल हुए। यह बैठक ट्रंप के एक बार फिर चुनाव के बाद शुरू किए गए नए प्रारूप के तहत आयोजित की गई थी। साथ ही बैठक में इन मंत्रियों ने यूक्रेन के समर्थन और अपनी हथियार उत्पादन क्षमता को मजबूत करने पर भी चर्चा की।
बैठक के बाद रक्षा मंत्रियों का तर्क
बैठक को लेकर जर्मनी के रक्षा मंत्री बोरिस पिस्टोरियस ने कहा कि देशों के बीच रक्षा खर्च के बारे में केवल प्रतिशत पर बहस करना मददगार नहीं है, क्योंकि यह नाटो के तय लक्ष्यों की दिशा में आगे नहीं बढ़ाता। उन्होंने यह भी कहा कि अगर जर्मनी को अपने रक्षा खर्च को 5 प्रतिशत तक बढ़ाना होता तो इसका मतलब होता कि देश का लगभग 40 प्रतिशत बजट रक्षा पर खर्च करना होगा जो व्यावहारिक नहीं होगा।
इसके अलावा इटली के रक्षा मंत्री गुइडो क्रोसेटो ने कहा कि उनकी सरकार रक्षा खर्च बढ़ाने के पक्ष में है, लेकिन इसे आर्थिक संकट और अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करने की जरूरत से संतुलित करना होगा।
फ्रांस के रक्षा मंत्री की चेतावनी
साथ ही फ्रांस के रक्षा मंत्री सेबेस्टियन लेकोर्नू ने कहा कि सुरक्षा खर्च बढ़ाना जरूरी है लेकिन केवल सैन्य उद्देश्य के लिए नहीं, बल्कि साइबर हमलों, आतंकवाद और अन्य गैर-सैन्य खतरों से भी समाज की रक्षा के लिए इसका इस्तेमाल होना चाहिए।
साथ ही लेकोर्नू ने चेतावनी दी कि वर्तमान स्थिति शीत युद्ध से भी अधिक गंभीर है, क्योंकि हम नए डिजिटल खतरे और साइबर युद्ध का सामना कर रहे हैं, और ऐसे में हमारी रक्षा केवल पारंपरिक सैन्य उपायों से कहीं आगे जाएगी। उन्होंने कहा कि आप देख सकते हैं कि हम एक ऐसी दुनिया में हैं जहां हम पर आक्रमण किए बिना भी पराजित किया जा सकता है और इसका मतलब है कि हमारे देशों की रक्षा की जिम्मेदारी केवल सैन्य मुद्दों से कहीं आगे जाएगी।