स्विट्ज़रलैंड की संसद के निचले सदन ने उस विधेयक पर बहस करने से इनकार कर दिया है जिसमें स्विस बैंकों को अपने ग्राहकों की जानकारियां अमेरिकी कर महकमे को देने की इजाजत दी गई थी।
इस विधेयक को कुछ अमेरिकियों के कर से बचने में स्विस बैंकों की कथित भूमिका के बाद पड़े अमेरिकी दबाव के नतीजे के तौर पर देखा जा रहा है।
इस सिलसिले में अमेरिका ने एक जुलाई तक कार्रवाई किए जाने की मांग की थी लेकिन स्विट्ज़रलैंड की संसद का ग्रीष्मकालीन सत्र इसी हफ्ते खत्म हो गया।
निचले सदन में खारिज किए जाने के बाद यह विधेयक अब सीनेट के पास लौट जाएगा।
निचले सदन में बहस कराए जाने को लेकर मतदान कराया गया।
राजस्व का नुकसान
मतदान न कराए जाने के पक्ष में 126 सासंदों ने वोट दिया और जबकि 67 सांसद विधेयक पर बहस कराए जाने के पक्ष में थे।
हालांकि निचले सदन ने अगर दोबारा इस विधेयक पर बहस करने से इनकार कर दिया तो इस प्रस्तावित कानून की संभावनाएं समाप्त हो जाएंगी।
यह विधेयक स्विस बैंकों को देश के कड़े गोपनीयता कानूनों को दरकिनार कर अपने ग्राहकों के खाते से जुड़ी जानकारियां जारी करने की इजाजत देता था।
कहा जा रहा है कि इस विधेयक में कुछ छुपे हुए प्रावधान ऐसे भी थे जिनसे कर राजस्व के नुकसान की भरपाई के तौर पर बैंको को 10 अरब डॉलर की अनुमानित राशि का भुगतान करना पड़ना सकता था।
बीबीसी के इमोगेन फाउल्केस ने बर्न से बताया कि स्विट्ज़रलैंड के राजनेता अपने कानूनों में बदलाव के पक्ष में कतई नहीं थे क्योंकि अमरीका उन्हें ऐसा करने के लिए कह रहा है।
राजनीतिक संकट
सीनेट ने बहुत हिचकिचाहट के साथ पिछले हफ्ते ही इस विधेयक को मंजूरी दी थी।
ऐसा माना गया कि अमेरिका स्विस बैंकों को दोषी ठहराएगा और इस बात की संभावना भी जताई गई कि अगर इस कानून को पारित नहीं किया गया तो उन्हें डॉलर बाजार में कारोबार करने से रोका जा सकता है।
स्विट्ज़रलैंड में बैंकों की गोपनीयता से जुड़ी लंबी परंपरा रही है और अब ये राजनीतिक संकट की वजह बनती जा रही है।
अमेरिकी ग्राहकों को 1।2 बिलियन डॉलर की कर चोरी में मदद पहुंचाने के आरोपों को अदालत में कुबूल करने के बाद स्विट्ज़रलैंड के सबसे पुराने प्राइवेट बैंक वेगेलिन पर अमेरिकी कर विभाग ने 58 मिलियन डॉलर का हर्जाना लगाया था।
इस घटना के बाद जनवरी में वेगेलिन बंद कर दिया गया।
साल 2009 में स्विस बैंक यूबीएस ने दोषी करार दिए जाने से बचने के लिए 780 मिलियन डॉलर के साथ-साथ चार हजार खाता धारकों से जुड़ी जानकारियां दी थी।