न्यूजीलैंड की स्थानीय मीडिया के मुताबिक एक ब्रिटिश नागरिक 15वीं मंजिल से गिरने के बाद भी जीवित बच गए।
20 साल के टॉम स्टिलवेल रविवार की दोपहर ऑकलैंड स्थित अपने घर के पड़ोसी की बालकनी से गिर गए।
वे अपने पड़ोसी की बालकनी के ठीक नीचे मौजूद अपनी बालकनी में जाने की कोशिश कर रहे थे।
वे इसलिए बच गए क्योंकि वे बगल वाली इमारत की तेरह मंजिल नीचे वाली छत पर गिरे। बताया जा रहा है कि उनके गिरने से वह छत टूट गई।
वैसे इतनी ऊंचाई से गिरने के बाद जीवित बचने की संभावना बेहद कम ही होती है लेकिन ऐसे लोग हैं जो इससे भी ऊंचाई से गिरने के बाद जीवित बच गए हैं।
विमान से गिरे, पेड़ में अटके
1971 में क्रिसमस के दिन 17 साल के जूलिएन कोएपेके अपनी मां के साथ विमान से सफ़र कर रहीं थीं। जब उनका विमान पेरू के जंगलों के ऊपर से गुजर रहा था तभी उस पर बिजली गिर गई।
उन्होंने बीबीसी को 2012 में बताया था, “मैं तो झटके से गिरी। मैं सीट बेंच में फंसी हुई थी और सिर के बल नीचे गिरने लगी। मुझे सिर्फ हवा की सनसनाहट सुनाई पड़ रही थी।”
जूलिएन खुशकिस्मत थीं कि वह 3.2 किलोमीटर की ऊंचाई से नीचे गिरने के बावजूद जीवित बच गईं। हालांकि वे जंगल में गिरीं और उनके कंधे की हड्डी टूट गई और उनका पांव जख्मी हो गया। उनके अलावा इस विमान में मौजूद सभी 91 लोगों की मौत हो गई थी।
जूलिएन के पास बस मिठाईयों का एक पैकेट था, और वे एक स्लीवलेस मिनी ड्रेस में जंगल में गिरी थीं।
वे इससे पहले अपने माता-पिता के साथ डेढ़ साल जंगल में स्थित रिसर्च स्टेशन में बीता चुकी थीं लिहाजा उन्हें बहुत ज़्यादा मुश्किलों नहीं हुईं। लेकिन दसवें दिन जाकर उन्हें लकड़हारों के एक दल ने देखा तब जाकर वे आम लोगों के बीच पहुंच पाईं।
जूलिएन अपनी बचने की कई वजहें गिनाती हैं। उनके मुताबिक हवा के झोंके ने उनकी गिरने की गति धीमी कर दी, तीन सीट वाली बेंचों पर वे बैठी हुईं थीं, जिससे उन्हें मदद मिली और वे काफी घने जंगल में गिरीं थीं, और इन सबसे उनकी जान बची।
विश्वयुद्ध में चमत्कार
मार्च 1944 में रॉयल एयर फोर्स के रियर गनर फ्लाईट सार्जेंट निकोलस अल्कीमेड एक लैंस्सेटर बमवर्षक विमान में थे। एक हमले के दौरान विमान में आग लग गई।
आग में उनका पैराशूट भी जल गया। ऐसे में अल्कीमेड जान बचाने के लिए 18 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई से कूद गए।
वे बर्लिन के बाहरी इलाके में स्थित पाइन फॉरेस्ट के गहरे बर्फ में गिरे। बर्फ से लदे पेड़ पौधों के चलते उनकी जान बच गई। हालांकि उन्हें कलाई और पांव टूट जरूर गए।
नाजी पार्टी की ख़ुफिया पुलिस ने जब उन्हें तलाशा तो उन लोगों को अल्कीमेड की कहानी पर यकीन ही नहीं हुआ।
अल्कीमेड की तरह ही 1943 में अमेरिकी बुर्ज गनर एलन मैगी बिना पैराशूट के करीब 22 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई से फ्रांस में गिरे और बच गए।
जबकि 1942 में सोवियत नेविगेटर इवान किसोव करीब 23 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई से गिरने के बाद जीवित बच गए।
स्काई डाइविंग की चूक
ग्रेट ब्रिटेन के स्टाफोर्डशायर के जेम्स बूले रूस में करीब छह हज़ार फ़ीट की ऊंचाई से गिरने के बाद भी जीवित बच गए।
वे एक स्काई डाइवर की शूटिंग कर रहे थे, उन्हें अपने पैराशूट खोलने का संकेत मिलने वाला था, लेकिन संकेत मिलने में देरी से उनकी जान पर बन आई।
उन्होंने बताया, “मुझे लगा कि मैं मरने जा रहा हूं।” वे पहले भी आसमान से करीब ढाई हजार छलांगें लगा चुके थे लेकिन उस दिन गिरने पर वे बर्फ में एक मीटर गहरे धंस गए। उनके पीठ की हड्डी टूट गई लेकिन एक सप्ताह के बाद मदद के सहारे वे चलने फिरने लगे थे।
बर्फ़ ने बचाई जान
जनवरी, 1972 में 22 साल के यूगोस्लावियाई फ्लाइट सहायक वेसना वूलोविक के विमान में चरमपंथियों के रखे बम की वजह से विस्फोट हो गया।
गिनीज़ बुक ऑफ़ रिकॉर्ड्स के मुताबिक वेसना ने 33 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई से छलांग लगाई और पूर्व चेकोस्लोवाकिया के सर्बस्का केमिनिक इलाके में बर्फ में गिरीं।
उनके सिर में काफी चोट लगीं, स्पाइनल कोड तीन जगह से टूट गया और दोनों पैर टूट गए लेकिन वह बच गईं। इस हादसे के बाद वेसना ने कहा, “इस हादसे के बाद मुझे यात्रा करने में मजा आने लगा और उड़ान भरने में कोई डर भी नहीं रहा।”
पैराशूट का धोखा
1996 में बियर ग्रायल का एक एडवेंचर और टेलिविजन करियर महज 21 साल में तब लगभग खत्म हो गया तब जब वे एसएएस ट्रेनिंग में हादसे का शिकार हो गए।
जांबिया में एक स्काईडाइव के दौरान 16 हज़ार फ़ीट की ऊंचाई पर उनके पैराशूट ने धोखा दे दिया। उन्होंने बाद में डेली मेल से कहा, “मुझे रिजर्व पैराशूट को आजमाना चाहिए था लेकिन मुझे लगा कि समय के साथ पैराशूट खुल जाएगा।”
वे अपने पैराशूट पैक के साथ ही जमीन पर आ गिरे। उनकी कुछ हड्डियां जरूर टूटीं लेकिन वे अगले ही साल दस घंटे रोजाना के फ़िटनेस कार्यक्रम से जुड़ कर स्वास्थ्य लाभ करने लगे।
हादसे के 18 महीने के बाद उन्होंने एवरेस्ट के शिखर तक पहुंचने का कारनामा कर दिखाया।
जॉन कैली (संवाददाता, बीबीसी न्यूज़ मैगज़ीन)