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महान वैज्ञानिक स्टीफन हॉकिंग को आखिर क्यों नहीं मिल पाया नोबेल पुरस्कार

Thu, 15 Mar 2018 01:15 AM IST
एजेंसी, लंदन
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Stephen Hawking
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स्टीफन हॉकिंग के भौतिक विज्ञान के सिद्धांतों ने वैज्ञानिकों के साथ-साथ आम आदमी के ब्रह्मांड को देखने के नजरिये को बदल कर रख दिया। उनका योगदान इतना महान है कि उसकी तुलना अल्बर्ट आइंस्टीन की उपलब्धियों से ही की जा सकती है।
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वैज्ञानिकों को उन्होंने ब्लैक होल और ब्रह्मांड की उत्पत्ति के सिद्धांतों से चकित किया तो आम आदमी को रिकॉर्ड तोड़ बिक्री करने वाली अपनी पुस्तक ‘ए ब्रीफ हिस्ट्री ऑफ टाइम’ से हैरानी में डाला। इस किताब की एक करोड़ कापियां बिकी और उसका 40 भाषाओं में अनुवाद हुआ।

बिग बैंग का सिद्धांत

ब्रह्मांड के बारे में बुनियादी सिद्धांतों को स्टीफन हॉकिंग ने दो बार प्रस्तुत किया। पहली बार उन्होंने सैद्धांतिक रूप से साबित किया कि अगर अल्बर्ट आइंस्टीन का सापेक्षता का सिद्धांत सही है तो ब्रह्मांड की उत्पत्ति 15 अरब साल पूर्व ‘बिग बैंग’ के रूप में हुई थी। 
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बदल दी अपनी ही थ्योरी

बहरहाल, बिग बैंग का सिद्धांत प्रस्तुत करने के कुछ साल बाद उन्होंने इसे पलट दिया और साबित किया कि ब्रह्मांड का न तो आदि है और न ही अंत। ब्रह्मांड एक स्वनिहित पदार्थ है और धरती की सतह की तरह न तो इसका कोई किनारा है और न ही सीमा। इसके मद्देनजर उन्होंने आइंस्टीन के सापेक्षता के सिद्धांत में बदलाव की जरूरत बताई। 

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को बताया खतरा

stephen Hawking - फोटो : HAWKING.ORG.UK
कैसे गायब होता है ब्लैक होल

शास्त्रीय भौतिकी शास्त्र में मान्यता थी कि ब्लैक होल से कुछ भी बाहर नहीं निकल सकता है, लेकिन हॉकिंग ने इसे गलत साबित किया। उन्होंने क्वांटम सिद्धांत के आधार पर यह सिद्ध किया कि ब्लैक होल से गरमी बाहर निकलती है और इस प्रक्रिया में आखिरकार वे गायब हो जाते हैं। यह प्रक्रिया धीमी होती है।

सूर्य के बराबर द्रव्यमान वाले ब्लैक होल को गायब होने में ब्रह्मांड की आयु से भी ज्यादा समय लगेगा, लेकिन छोटे ब्लैक होल जल्दी ओझल होते हैं और अपने आखिरी समय में भारी मात्रा में गरमी पैदा करते हैं जो एक मेगाटन के 10 लाख हाईड्रोजन बम के बराबर होती है।

आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस को बताया खतरा

बीबीसी न्यूज को 2014 में दिए गए एक साक्षात्कार में हॉकिंग ने चेतावनी दी थी कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस (एआई) और सोचने वाली मशीनों के कारण मानव जाति का अस्तित्व खतरे में पड़ सकता है।

पिछले साल ‘वायर्ड’ पत्रिका को उन्होंने बताया था कि एआई अंत में एक ऐसे स्तर पर पहुंच जाएगा जहां यह इंसानों को पीछे छोड़ देगा। अगर लोग कंप्यूटर वायरस डिजाइन कर सकते हैं तो कोई भविष्य में ऐसे एआई डिजाइन कर सकता है जो खुद में खुद ही सुधार कर सके और अपनी प्रतिकृति बना सके। 

एलियंस से संपर्क की जरूरत नहीं

स्टीफन हॉकिंग - फोटो : self
जलवायु परिवर्तन पर चेतावनी

जलवायु परिवर्तन के कारण वर्ष 2600 तक धरती आग के गोले में तब्दील हो जाएगी और तब मानव सभ्यता का अंत हो जाएगा। इसके मद्देनजर उनका मानना था कि इनसानों को अगर अगले 10 लाख साल तक अपना अस्तित्व बचाए रखना है तो उसे 100 साल के अंदर दूसरे ग्रहों पर उपनिवेश बनाने की जरूरत पड़ेगी।

एलियंस से संपर्क की जरूरत नहीं

वर्ष 2010 में अपने एक व्याख्यान में उन्होंने स्पष्ट किया था कि ब्रह्मांड जितना बड़ा है, उसके अनुसार एलियंस यानी परग्रहवासियों के अस्तित्व को नकारा नहीं जा सकता। लेकिन वे उनसे संपर्क करने के खिलाफ थे क्योंकि ऐसा करने से एलियंस द्वारा धरती से संसाधनों को लूटने की कोशिश की जा सकती है। 

जीवन के बाद कोई जीवन नहीं

Hawking visit
धर्म नहीं विज्ञान हुआ है सफल

उन्होंने खुद को हमेशा धर्म से अलग बताया। उनका दावा था कि धर्म जहां किसी शासन की तरह काम करता है वहीं विज्ञान तर्क पर आधारित है। यही वजह है कि धर्म के मुकाबले विज्ञान ज्यादा सफल है। उन्होंने ईश्वर के अस्तित्व को भी नकारा था और वर्ष 2014 में खुद को खुले तौर पर नास्तिक घोषित कर दिया था।

जीवन के बाद कोई जीवन नहीं

हॉकिंग ने द गार्जियन को एक इंटरव्यू में खुलकर कहा था कि स्वर्ग एक मिथ्या है। स्वर्ग या मृत्यु उपरांत जीवन जैसी कोई चीज नहीं है। ये केवल परिकथा है जिनसे लोगों के डर को खत्म करने की कोशिश की जाती है। 
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फिर भी नहीं मिला नोबेल पुरस्कार

Stephen Hawking
फिर भी नहीं मिला नोबेल पुरस्कार

ब्रह्मांड के रहस्यों पर से पर्दा उठाने के बावजूद हॉकिंग को कभी नोबेल पुरस्कार नहीं मिला। इसकी एक बड़ी वजह यह है कि उन्होंने जो कुछ भी किया वह सैद्धांतिक रूप से तो साबित किया जा सकता है लेकिन उसका कोई अनुभवजन्य साक्ष्य अब तक हासिल नहीं किया जा सका है। 
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