कामयाबी के शिखर को छूने वाले मशहूर लोगों को करीब से देखें तो ऐसा लगेगा कि उनकी किस्मत और वहम का शायद कहीं कोई रिश्ता हो!
हॉलैंड के मशहूर फुटबॉल खिलाड़ी जोहान क्रफ मैच की शुरुआत से पहले अपने गोलकीपर की पेट पर चपत लगाया करते थे। कहा जाता है कि हॉलीवुड अदाकारा जेनिफर एनिस्टन हवाई जहाज पर अपना दाहिना कदम रखने से पहले उसे बाहर से छू लेती हैं।
अच्छी किस्मत के लिए लकड़ी छूने से लेकर सीढ़ियों के इर्द-गिर्द टहलने तक हम जाने क्या-क्या करते हैं। हम सब की रोजमर्रा की जिंदगी में कुछ न कुछ वहम का असर दिखता है। हम इसके बारे में सोचना छोड़ दें तो शायद ही कुछ बदले और इन हरकतों से अच्छी किस्मत हमेशा नहीं आती।
तो सवाल यह उठता है कि हम खुद को दोहराते क्यों हैं? बिना ज्यादा सोचे जब हम आदतन कोई काम करते हैं तो उसमें खास दिमागी मशक्कत नहीं करनी पड़ती। हमारे मस्तिष्क में ऐसी मशीनरी मौजूद है जो नई चीजों को जल्दी अपना लेती है।
मनोवैज्ञानिक प्रयोग
कहते हैं कि वहम का मर्ज कबूतरों में भी हो सकता है। मनोवैज्ञानिक बीएफ स्किनर ने इसे एक प्रयोग के जरिए दिखाया है। एक भाषण में उन्होंने पिंजरें में बंद कबूतर को हर 15 सेकेंड में स्वचालित मशीन के जरिए दाना चुगने दिया। लेक्चर की शुरुआत में कबूतरों को बक्से में ढकने से पहले दर्शकों को उनके व्यवहार को समझने का पूरा मौका दिया गया।
50 मिनट बाद बक्से को खोलने पर देखा गया कि अलग अलग कबूतरों का व्यवहार भिन्न था। एक कबूतर भोजन के बक्से को देखने से पहले घड़ी की विपरीत दिशा में तीन बार मुड़कर देखता हुआ पाया गया । दूसरा कबूतर ऊपर के बाएं कोने की तरफ अपनी गर्दन कोंचते हुए देखा गया।
दूसरे शब्दों में कहें तो आप सभी कबूतरों में कुछ खास किस्म का रवैया अपनाते हुए देखेंगे जो वे बार-बार दोहराएंगे। स्किनर ने इस बर्ताव के बारे में कहा कि यह जितना स्पष्ट है उतना ही शानदार भी। जैसा कि हम जानते हैं कि कबूतरों के व्यवहार को नजरअंदाज करते हुए उन्हें भोजन मुहैया कराया गया। कबूतरों को इसके बारे में पहले से पता नहीं था।
मनुष्यों का व्यवहार
इसलिए जरा कल्पना कीजिए कि अगर कबूतरों की जगह आप होते तो क्या करते। आपके पास मनुष्यों की दुनिया, पिंजरों और स्वचालित दाना देने वाली मशीन के बारे में बहुत थोड़ी जानकारी है।
घड़ी भर के लिए आप पिंजरें में हों और आप तय करते हैं कि घड़ी की सुई की विपरीत दिशा में आप तीन बार मुड़ेंगे और ठीक उसी लम्हें आपको खाना दिखता हो। अगर दुबारा ऐसा हुआ तो आप क्या करेंगे।
ज़वाब जाहिर है कि वही होगा कि आपने अभी अभी जो किया है, आप उसे दोहराना चाहेंगे। आप खुद को दोहराते हैं और वही होता है, खाना हाजिर है। स्किनर इस प्रयोग से निष्कर्ष निकालते हैं कि इस तरह से वहम या अंधविश्वास पनपता है।
वहम हमारे व्यवहार का हिस्सा बन जाता है क्योंकि हमारा दिमाग वही करना चाहता है जिससे अतीत में सफलता मिली हो। यहां तक कि हम यह भी नहीं देख पाते कि इनका क्या असर हुआ। दुनिया के काम करने के तरीके को समझने और बेहतर नतीज़े पाने का अगर कोई विकल्प दिया जाए तो ऐसा कम ही होगा कि आपने जो पिछली बार जो किया था, उसे न दोहराएं। बशर्ते ऐसा करने से अच्छे नतीज़े मिले हों।
खिलाड़ियों में वहम
खेलों में जहां दाव पर बहुत कुछ लगा होता है। हमारे दिमाग पर कामयाबी पाने का बहुत दबाव रहता है कि कैसा व्यवहार करें कि सफल हो जाएं।
कुछ खास तौर-तरीके खिलाड़ियों के लिये मददगार भी होते हैं। इससे उन्हें आराम महसूस होता है। बड़े खेलों के दौरान यह उनकी पहले से चली आ रही दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है।
टाइगर वुड्स टूर्नामेंट के आखिरी दिन हमेशा लाल रंग पहनते हैं। वह कहते हैं यह उनके लिये ताकतवर रंग है। बेसबॉल खिलाड़ी वेड बॉग्स कहते हैं कि खेल की पिछली रात को वह चिकन खाते हैं ताकि बेहतर हिट मार सकें।
हम इन आदतों को अपना लेते हैं क्योंकि हम खतरा मोल नहीं लेना चाहते कि अगर ऐसा न किया तो क्या होगा। अपने बेतुकेपन के बावजूद ये आदतें बरकरार रहती हैं।