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शहरी टिड्डों ने सेक्स के लिए बदली प्रेमधुन

Sat, 17 Nov 2012 07:09 PM IST
बीबीसी हिंदी
क्या आप जानते हैं कि टिड्डे एक खास तरह की धुन गुनगुनाते हैं जिसके जरिए वे अपना साथी तलाशते हैं? लेकिन अब एक शोध में पता चला है कि वे शहरों में होने वाले शोर-शराबे से परेशान हैं। दरअसल उनकी ये प्यार भरी धुन शहर के बढ़ते शोर में गुम जाती है और अपने प्यार को पाने में उन्हें परेशानी हो रही है।


लेकिन उन्होंने इस समस्या का एक समाधान निकाल लिया है। वैज्ञानिकों के मुताबिक़ टिड्डे अपना प्यार पाने के लिए अपने सुर बदल रहे हैं। जर्मनी के जीव वैज्ञानिकों का कहना है कि ये चालाक टिड्डे अपने जीवनसाथी को रिझाने के लिए उन नई आवाजों का इस्तेमाल कर रहे हैं जो शहरी माहौल के शोर शराबे में गुम नहीं होती।

बेल्फेल्ड विश्वविद्यालय के एक जीव वैज्ञानिक यूलरिक लैंप के अनुसार टिड्डे अपनी आवाज़ों से मादा टिड्डों को संभोग के लिए आमंत्रित करते हैं लेकिन शहरों की व्यस्त सड़कों पर मौजूद तेज़ शोर में टिड्डों की ये आवाज दब कर रह जाती है।


बदलती आवाजें
शोर-शराबे की वजह से इनके संभोग करने की संभावनाएं कम हो जाती हैं। यूलरिक लैंप कहते हैं कि नर टिड्डे मादा टिड्डे को आकर्षित करने के लिए गानों का सहारा लेते हैं। मादा टिड्डों को वो गाने ज्यादा पसंद आते हैं जिनमें धीमी फ्रीक्वेंसी की आवाजें हों। तो इस समस्या से पार पाने के लिए ये टिड्डे क्या करते हैं, लगता है कि ये अपनी आवाज बढ़ा देते हैं।

शांत जगहों और शोर शराबे वाली जगहों में शोधकर्ताओं ने लगभग 200 से ज्यादा टिड्डों की आवाज़ों को रिकॉर्ड किया। इनकी हजारों आवाजों की तुलना के बाद पाया गया कि जो टिड्डे शोर शराबे वाले इलाक़े में रहते थे वो अलग तरह की आवाज निकाल रहे हैं।

ये पहले से ही पता है कि पक्षी, व्हेल मछलियां और मेंढक मानव निर्मित आवाज़ों से पार पाने के लिए अपनी आवाज़ें बदलते हैं। जीव वैज्ञानिक यूलरिक का कहना है कि ये पहली बार है कि कीट पतंगों में इस तरह के बदलाव देखे गए हैं।
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