ब्रितानी नागरिक लेज्ली उडविन की डॉक्यूमेंट्री फिल्म 'इंडियाज डॉटर' के कुछ ही दिन बाद एक भारतीय हरविंदर सिंह ने 'यूनाइटेड किंगडम्स डॉटर' नामक डॉक्यूमेंट्री बनाई है।
इस डॉक्यूमेंट्री में ब्रिटेन में औरतों की स्थिति के बारे में बताया गया है। यूनाइटेड किंगडम्स डॉटर के मुताबिक ब्रिटेन में रोजाना 250 महिलाओं के साथ बलात्कार होता है।
फिल्म में यह दावा भी किया गया है कि 10 फीसदी ब्रितानी महिलाओं ने अपने साथ यौन उत्पीड़न की बात स्वीकार की है।
'यूनाइटेड किंगडम्स डॉटर' डॉक्यूमेंट्री सोशल मीडिया, खासकर ट्विटर पर छाई हुई है। इसके समर्थन और विरोध में बड़ी संख्या में लोग ट्वीट कर रहे हैं।
कुछ लोगों का कहना है कि यह डॉक्यूमेंट्री एक ब्रिटिश नागरिक को एक भारतीय नागरिक की ओर से दिया गया करारा जवाब है। कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि दूसरों की बुराइयां दिखाने से अपनी समस्याओं का हल तो नहीं निकलता है।
'डोंट मेस विद इंडिया'
ट्विटर पर सतीश पांडे ने इसे 'हिंदू विरोधी पश्चिमी मीडिया के मुंह पर तमाचा' बताया है। तपन घोष ने डॉक्यूमेंट्री बनाने के लिए हरविंदर सिंह को बधाई दी है।
हम भारत के लोग नाम से ट्विटर पर एक व्यक्ति ने इसे ब्रितानी फिल्मकार को एक भारतीय का सटीक जवाब बताया है। पर उसने यह उम्मीद भी जताई है कि इस फिल्म पर रोक नहीं लगाई जाएगी, वे यह भी जोड़ते हैं कि इस तरह की रोक सिर्फ भारत में ही लगाई जाती है।
अनुपम त्रिवेदी पूछते हैं कि इस फिल्म को दिखाना कैसा रहेगा। आई इंद्रजीत ट्वीट करते हैं कि महिलाओं पर होने वाले बलात्कार के मामले में ब्रिटेन पूरी दुनिया में पांचवी जगह पर है।
'हम अपनी गिरेबां में झांकें'
इस डॉक्यूमेंट्री के समर्थन में ट्वीट करने वालों की भी कमी नहीं है। @IMMugdhaSingh नाम के हैंडल से डॉ. मुग्धा सिंह कहती हैं, "डॉक्यूमेंट्री दूसरों को जानकारी बढ़ाने के लिए बनाई जानी चाहिए न कि बदले के तौर पर। यूनाइटेड किंगडम्स डॉटर जवाब नहीं अपमान है।"
शालिनीलर्निंगस्पेस कहती हैं कि बेहतर रहा होता यदि अपनी समस्याओं को दूर करने की दिशा में कोई फिल्म बनाई गई होती।
जीएफएसएन एशिया कहते हैं कि बेटी तो बेटी होती है, यह भारत की हो या ब्रिटेन की।