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यूक्रेन: जी-7 ने डाला दबाव, रूस बेपरवाह

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औद्योगिक देशों के समूह जी-8 में रूस के सहयोगियों ने यूक्रेन में रूस की सेना की मौज़ूदगी को लेकर उसकी आलोचना की है। इस संकट को गहराने से बचाने के लिए नए कूटनीतिक प्रयास शुरू हो गए हैं।
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साथ ही दुनिया की सात बड़ी औद्योगिक शक्तियों ने इस साल जून में सोची में प्रस्तावित जी-8 के सम्मेलन की तैयारियों को भी फिलहाल रोक दिया है।

इस बीच यूरोपीय संघ के विदेश मंत्रियों की ब्रसेल्स में एक आपात बैठक करने की संभावना है। यूक्रेन के स्वायत्त क्रीमिया क्षेत्र में रूस की सेना की बढ़ती मौज़ूदगी के बाद जी-8 में रूस के सहयोगियों ने यह क़दम उठाया है।

यूक्रेन की अंतरिम सरकार ने रूस पर युद्ध छेड़ने का आरोप लगाया है और साथ ही उसने अपने सशस्त्र बलों को तैयार रहने हो जाने को कहा है।

आलोचना
लेकिन रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने अपनी सेना को वापस बुलाने के पश्चिमी देशों की मांग को अनसुना करते हुए उलटे उनकी आलोचना की है।

उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि रूस के पास अपने हितों और क्रीमिया तथा यूक्रेन में अन्यत्र रूसी भाषा बोलने वाले लोगों की रक्षा करने का अधिकार है।

संयुक्त राष्ट्र ने रविवार को कहा था कि यूक्रेन के ज़मीनी हालात का पता लगाने के लिए उप महासचिव जान एलियासन वहां की यात्रा पर हैं।

एक बयान में कहा गया है कि एलियासन संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून को अपनी रिपोर्ट देंगे।

जी-7 ने रूस से अपील की है कि वह किसी भी मानवाधिकार या सुरक्षा चिंताओं को दूर करने के लिए यूक्रेन से वार्ता करे।

मदद की दरकार
व्हाइट हाउस की ओर से जारी बयान में कहा गया है, ''कनाडा, फ़्रांस, जर्मनी, इटली, जापान, ब्रिटेन, अमेरिका, यूरोपीय परिषद के अध्यक्ष और यूरोपीय आयोग रूसी संघ के यूक्रेन की क्षेत्रीय अखंडता और संप्रभुता पर हमले की निंदा करते हैं।''
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बयान में कहा गया है, ''हमने जून में सोची में होने वाले जी-8 देशों के सम्मेलन की तैयारियों से संबंधित गतिविधियों को कुछ समय के लिए स्थगित रखने का फ़ैसला किया है।''
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जी-7 के वित्त मंत्रियों ने कहा है कि वे यूक्रेन को मज़बूत वित्तीय मदद देने को तैयार हैं।

एक बयान में कहा गया है कि अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष यूक्रेन के ताज़ा आर्थिक हालात का सामना करने के लिए उसकी सहायता करने को तैयार है।

वित्त मंत्रालय के मुताबिक़ अगले दो सालों में यूक्रेन को 35 अरब डॉलर की ज़रूरत पड़ेगी।
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