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दिल के लिए काम आएगा इलेक्ट्रिक गुब्बारा, मिनटों में होगा मर्ज दूर

Sun, 29 Apr 2018 04:00 PM IST
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला
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दिल की अनियमित धड़कन की बीमारी के शिकार दुनिया भर के लाखों मरीजों का इलाज नई तकनीक इलेक्ट्रिक गुब्बारे से संभव होगा। दुनिया भर में इसका परीक्षण जारी है और सबसे पहले ब्रिटेन में इससे इलाज होगा। इस खोज के बाद अनियमित धड़कन की बीमारी की जटिल तकनीकों की जरूरत नहीं पड़ेगी। शोधकर्ताओं के मुताबिक आर्टियल फाइब्रिलेशन दिल की अनियमित धड़कन का सबसे बड़ा कारण है। सिर्फ ब्रिटेन में इसके दस लाख मरीज हैं। इसका इलाज दवा या फिर सर्जरी से होता है। 

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रक्त कोशिका से शुरू होती बीमारी

इस बीमारी में फेफड़े से दिल तक ऑक्सीजन ले जाने वाली एक या सभी चार रक्त कोशिका में असामान्य इलेक्ट्रिक पल्स शुरू हो जाती है। यह अतिरिक्त पल्स धड़कन को प्रभावित करती है। इससे दिल तेजी से धड़कने लगता है। चक्कर, थकान और सांस फूलने जैसे लक्षण नजर आने लगते हैं। अनियमित धड़कन के चलते हृदय ठीक से  रक्त पंप नहीं कर पाता और वहां रक्त एकत्रित होने लगता है। इससे रक्त के थक्के बनते हैं और यह रक्त का प्रवाह रोक देता, जो स्ट्रोक और दिल के दौरे का कारण बन जाता है। 

मौजूदा इलाज की तकनीक

डॉ. डगलस न्यूबेरी के बताया, वर्तमान में दवा से दिल की गति को नियंत्रित किया जाता है और रक्त पतला करने की दवा दी जाती है। पर गंभीर बीमारी में दवा असर नहीं करती है। फिर सर्जरी का विकल्प बचता है, जिसके दो तरीके हैं। पहले प्रकार में 28 मिमी का गुब्बारा जांघ की नस से फेफड़े की रक्त कोशिका के प्रवेश द्वार तक पहुंचाया जाता है। फिर नाइट्रोजन ऑक्साइड से गुब्बारे को माइनस 40 डिग्री सेल्सियस तक ठंडा करते हैं। इससे असामान्य पल्स बंद हो जाती है। 

वैज्ञानिकों ने खोजी नई तकनीक, तीन घंटे की जगह नब्बे मिनट में हो जाएगा ऑपरेशन

इस प्रक्रिया को बैलून क्राइयोबलेशन और गुब्बारे को कैथेटर कहते हैं। पर इसके परिणाम अलग-अलग आते हैं क्योंकि रक्त कोशिका का पिछला हिस्सा अगले हिस्से की तुलना में पतला होता है। इसलिए कुछ क्षेत्र का ज्यादा इलाज हो जाता है तो कुछ का कम। सर्जरी के दूसरे प्रकार में रक्त कोशिका के चारों ओर हिट का छल्ला तैयार कर असामान्य पल्स को रोका जाता है। पर यह प्रक्रिया जटिल होने के चलते कुछ ही मरीजों पर आजमाई जाती है।
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नई तकनीक

सेंट बार्थोलोमेव अस्पताल में ट्रायल की जा रही नई तकनीक रेडियो फ्रिक्वेंसी बैलून एबलेशन में पहली दोनों सर्जरी समाहित हैं। बैलून में लगे दस इलेक्ट्रोड रक्त कोशिका के प्रवेश द्वार पर गर्मी की सटीक खुराक पहुंचाते हैं, जिससे असामान्य सिग्नल बंद हो जाते हैं। यह बैलून सारी कोशिका वाहिनी को एक साथ निशाना बनाता है। बैलून को घुमाकर और इलेक्ट्रोड को नियंत्रित कर तय किया जा सकता है कि किस कोशिका वाहिनी को कितनी गर्मी पहुंचानी है।
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