बीड़ी-सिगरेट पीने वाली और हुक्का गुड़गुड़ाने वाली जो लड़कियां 30 साल तक की उम्र तक धूम्रपान की लत छोड़ देती हैं, उनमें तंबाकू संबंधी बीमारियों से मौत का खतरा लगभग पूरी तरह खत्म हो जाता है।
ब्रिटेन में 10 लाख से ज्यादा महिलाओं पर किए गए एक अध्ययन से ये बात सामने आई है। इस अध्ययन के नतीजे लांसेट पत्रिका में छपे हैं।
शोध में कहा गया है कि धूम्रपान करने वाले लोग, धूम्रपान ना करने वाले लोगों की तुलना में एक दशक कम जीते हैं। इसी तरह जो लोग 40 की उम्र तक धूम्रपान करते हैं, वे अपेक्षाकृत एक वर्ष जल्दी दम तोड़ देते हैं।
अध्ययन के मुताबिक, 30 की उम्र तक आते-आते धूम्रपान से तौबा कर लेने वाले लोगों की उम्र बस एक महीने कम हो जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इसका मतलब ये नहीं है कि 20 साल की उम्र तक जितना चाहे, उतना धूम्रपान किया जा सकता है।
तंबाकू और मौत का रिश्ता
अध्ययन में पहली पीढ़ी की उन महिलाओं को शामिल किया गया जिन्होंने 1950 और 1960 के दशक में धूम्रपान शुरू किया था।
पुरुषों की तरह बहुत अधिक धूम्रपान की लत महिलाओं को काफी बाद में लगी। इसी आधार पर लंबे समय तक धूम्रपान से उम्र पर पड़ने वाले असर को जानने के लिए अध्ययन में केवल महिलाओं को शामिल किया गया।
शोध में अहम भूमिका निभाने वाले ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर, सर रिचर्ड पेटो कहते हैं, ''हम जो कहना चाह रहे हैं, वो ये है कि यदि महिलाएं भी पुरुषों की तरह धूम्रपान करेंगी तो वो भी पुरुषों की तरह ही जल्दी मर जाएंगी।''
उन्होंने बीबीसी को बताया, ''धूम्रपान करने वाली आधी से अधिक महिलाएं तंबाकू की वजह से मारी जाएंगी। धूम्रपान जितना जल्दी बंद करेंगे, उतना अच्छा होगा।''
एक लाख बीस हजार महिलाओं पर किए शोध से पता चला है कि जो महिलाएं एक दिन में 10 से भी कम सिगरेट पीती हैं, उनके जल्दी मरने की संभावना बढ़ती जाती है।
सर रिचर्ड पेटो कहते हैं कि पुरूषों पर भी ये बात समान रूप से लागू होती है। ब्रिटिश लंग-फाउंडेशन का कहना है कि लोग यदि 30 साल की उम्र से पहले धूम्रपान छोड़ दें तो लंबे समय तक अच्छे स्वास्थ्य की संभावना बढ़ जाती है।