वेटिकन में ईसाइयों के सर्वोच्च धर्मगुरु पोप बेनेडिक्ट 16वें ने ऐतिहासिक सेंट पीटर्स बैसिलिका में हजारों श्रद्धालुओं को क्रिसमस के मौके पर दिए गए अपने संदेश में दुनिया भर में शांति का आह्वान किया है।
पोप ने अपने क्रिसमस संदेश में पहली दफा चीन के नेतृत्व के लिए भी दुआ की है। उन्होंने चीन के नेतृत्व से यह गुजारिश की है कि वे समाज में धर्म के योगदान का सम्मान करें। उनका मानना है कि चीन में एक भाईचारे वाला समाज बनाने में धर्म की अहम भूमिका हो सकती है।
ईसाइयों के धर्मगुरू ने चीन के नागरिकों को 'महान' भी बताया है। इस साल शांघाई में चीनी अधिकारियों ने एक नए कैथोलिक बिशप को हवालात में डाल दिया जिसकी वजह से चीन और वेटिकन के रिश्ते तल्ख़ हो गए थे।
शांति हो कायम
धर्मगुरू ने दुनिया के हिंसा से जूझ रहे कई देशों का हवाला देते हुए यह कामना की कि उन देशों में जल्द से जल्द शांति कायम हो। पोप ने अपने संदेश में कहा कि लड़ाई से जूझ रहे सीरिया और नाइजीरिया जैसे देश के लोगों को भी शांति की उम्मीद नहीं छोड़नी चाहिए।
उन्होंने नाइजीरिया में चल रहे संघर्ष को भी बर्बर चरमपंथ करार दिया जिसका निशाना अक्सर ईसाई समुदाय के लोग होते हैं। उन्होंने इसरायली और फलीस्तिनियों के बीच समझौते का पुरजोर तरीके से समर्थन करने के साथ ही सीरिया में हो रहे रक्तपात की निंदा भी की।
उन्होंने यह प्रार्थना की है कि ईसा मसीह की पवित्र जन्मस्थली पर शांति कायम हो और इसरायली तथा फलीस्तिनियों के बीच कई सालों से चल रहा विवाद खत्म हो। पोप ने उत्तरी अफ्रीका का हवाला देते हुए कहा कि वहां नए भविष्य की उम्मीद में एक व्यापक परिवर्तन को महसूस किया जा सकता है।
धर्मगुरू ने विशेषतौर पर मिस्र के लिए प्रार्थना की जहां के नागरिक हरेक व्यक्ति की स्वतंत्रता और सम्मान के लिए न्याय पर आधारित समाज बनाने के लिए मिलकर काम करें। उन्होंने अरब क्रांति से जुड़े सभी राष्ट्रों को भी सम्मानपूर्ण समाज बनाने के लिए प्रोत्साहित किया।