मंगलवार को स्पेन से जर्मनी जा रहे लुफ्थांसा के एयरबस विमान जर्मनविंग्स ए 320 को 38 हजार फुट की ऊंचाई पर को-पायलट ने जानबूझकर उसे फ्रांस की दक्षिणी पहाड़ियों पर ला पटका, जिसमें उसे मिलाकर छ: क्रू सदस्य और 144 यात्री मारे गए।
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विमान का मुख्य पायलट शौच के लिए बाहर गया था, लेकिन वापस आने पर को-पायलट आंद्रे ल्युबिट्स ने कॉकपिट लॉक कर लिया और दरवाजा नहीं खोला। जांच के दौरान दुर्घटनाग्रस्त विमान के मलबे से मिले कॉकपिट वाइस रिकॉर्डर की आवाजों को सुनकर फ्रांस के ब्राइस रॉबिन ने इसकी तस्दीक की।
ब्राइस ने कहा कि को-पायलट का पूरा इरादा विमान को नष्ट करने का था, इसीलिए उसने कॉकपिट को लॉक कर विमान का पूरा नियंत्रण अपने हाथ में ले लिया। उन्होंने बताया कि मुख्य पायलट द्वारा कॉकपिट छोड़कर जाने के बाद से को-पायलट ने एक भी शब्द नहीं कहा और कॉकपिट में एकदम खामोशी छायी रही।
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दुर्घटना के अंतिम मिनट में जैसे ही अलार्म बजा, दरवाजे पर जोरदार धमाका सुनाई दिया। वृहस्पतिवार को भी एल्प्स की पहाड़ियों में तलाशी अभियान जारी रहा। पुलिस और फोरेंसिक टीम सबूत और मलबे को इकट्ठा करने में जुटी रही। इस काम में हेलीकॉप्टर की मदद भी ली जा रही है। फिलहाल विमान का डाटा रिकॉर्डर नहीं मिला है, जिसके मिलने पर दुर्घटना के कुछ और रहस्यों से पर्दा उठ सकता है।
पायलट ने पीटा था कॉकपिट का बंद दरवाजा
स्पेन के बार्सिलोना से जर्मनी के डसेलडॉर्फ शहर के लिए उड़ान भरने वाला जर्मनविंग्स का विमान जब तक फ्रांस के तटवर्ती इलाके को पार नहीं किया था तब तक अंदर सब कुछ शांत था, लेकिन विमान के एल्प्स पहाड़ियों के करीब आते आते यात्रियों की चीख पुकार बढ़ गई।
कॉकपिट में इतनी खामोशी थी कि खुद को लॉक कर अंदर बैठे को-पायलट की सांसें तक साफ साफ सुनाई दे रही थीं। बाहर कॉकपिट का दरवाजा पीटने की आवाजें भी विमान के उस वाइस रिकॉर्डर में साफ साफ सुनी जा सकती हैं, जो हादसे के वक्त हर आवाज कैद कर रहा था।
फ्रांसिसी शहर मार्से के सरकारी अभियोजक ब्राइस रॉबिन ने ब्लैक बॉक्स के वाइस रिकॉर्डर से मिली जानकारी का हवाला दिया और बताया कि हादसे से पहले 38,500 फुट की ऊंचाई पर विमान केवल एक मिनट तक ही रहा। इसके बाद कॉकपिट में मौजूद को-पायलट आंद्रे ल्युबिट्स ने उसे जानबूझकर नीचे की तरफ लाना शुरू किया।
इस बीच आठ मिनट तक वह हवा में ही गोते लगाता रहा। इन आठ मिनटों के दौरान अंदर बैठे यात्रियों की चीख पुकार वाइस रिकॉर्डर में साफ साफ सुनी जा सकती है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि यात्रियों को अपने अंत का पता लग चुका था, लेकिन कॉकपिट में बैठे को-पायलट के कैबिन में सन्नाटा था।
विमान में बैठे लोगों को दिखने लगा था अंत
इसी वाइस रिकॉर्डर को सुनकर जांच दल के वरिष्ठ सैन्य अधिकारी ने बताया कि मुख्य पायलट कॉकपिट से बाहर जाने के बाद उसमें वापस नहीं आ पाया। वाइस रिकॉर्डर में कैद आवाजों के हिसाब से पता चलता है कि मुख्य पायलट ने पहले धीरे से कॉकपिट का दरवाजा खटखटाया।
लेकिन अंदर से कोई उत्तर नहीं मिलने पर उसने दरवाजे पर जोर जोर से दस्तक देने पर भी अंदर बैठा को-पायलट शांत बना रहा। इसके बाद मुख्य पायलट द्वारा दरवाजा तोड़ने की कोशिश भी वाइस रिकॉर्डर में सुनाई दे रही है।
हादसे के बाद जांच ब्यूरो की निदेशक और विश्लेषक रेमी जौटी ने बताया कि मंगलवार की सुबह 10 बजे विमान के उड़ान भरने के बाद ठीक आधा घंटे बाद ट्रैफिक कंट्रोल को विमान में सब कुछ सामान्य होने का संदेश पायलट ने दिया था।
स्वभाव से शांत और खुशमिजाज था आंद्रे
करीब 10 बजकर 40 मिनट 47 सेकण्ड बजे तक राडार पर विमान की आखिरी पोजीशन 6,175 फुट ऊंचाई पर दर्ज हुई थी, और हादसा होने तक राडार पर सब कुछ दर्ज हुआ था। लेकिन अचानक विमान हिचकोले खाने लगा और फ्रांस की एल्प्स पहाड़ियों से टकराकर एक बड़े धमाके के साथ चूर चूर हो गया।
अब इस पूरे इलाके में दूर दूर तक दुर्घटनाग्रस्त विमान का मलबा और चीथड़े उड़ चुके लोगों के शरीर के हिस्से दिखाई पड़ रहे हैं। हादसे के दौरान मरने वालों में जर्मनी के 72 और स्पेन के 51 नागरिक शामिल थे।
जर्मनी के मोंटाबोर शहर में को-पायलट आंद्रे ल्युबिट्स के करीबी ने बताया कि वह उसे पिछले बीस वर्षों से जानते हैं, और उसे ग्लाइडर पायलट लाइसेंस रिन्यू होने के बाद आखिरी बार देखा था, उस वक्त तक उसमें अवसाद का कोई लक्षण नहीं था।
इसी तरह ग्लाइडर क्लब के सदस्य पीटर रुकर ने बताया कि जर्मनविंग्स में नौकरी मिलने के बाद से आंद्रे काफी खुश था। उसने किशोरावस्था में ही ग्लाइडर पायलट का लाइसेंस हासिल कर लिया था। पीटर ने बताया कि वह कुछ शांत तो रहता था लेकिन दोस्ती पसंद युवा था।
लुफ्थांसा ने फिलहाल अपने मुख्य पायलट के बारे में पूरी जानकारी जारी नहीं की है लेकिन बताया कि वह काफी अनुभवी था और 6000 घंटे से ज्यादा देर तक की उड़ान का अनुभवी था। उसने कोन्डोर के लिए भी काम किया और मई 2014 लुफ्थांसा को ज्वाइन किया।
उधर, यूके से प्रकाशित द गार्डियन के मुताबिक विमान के मुख्य पायलट को 10 साल का गहरा अनुभव था, इसलिए उसके काम पर कोई संदेह तक नहीं किया जा सकता था। को-पायलट आंद्रे को ट्रेनिंग के ठीक बाद सितम्बर 2013 में लुफ्थांसा की जर्मनविंग्स में बतौर को-पायलट नौकरी मिल गई।
आतंकी वारदात भी नहीं बीबीसी ने अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा है कि विमान हादसे के पीछे कोई आतंकी गतिविधि होने की बात सामने नहीं आई है। आखिरी वक्त से कुछ समय पहले तक पायलट से होने वाला सामान्य संवाद इसका प्रमाण है। हाइजैक होने की स्थिति में क्रू अथवा पायलट की आवाज में दहशत होती है वह नहीं थी।