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ग्लोबल वॉर्मिंग को रखना होगा दो डिग्री से नीचे

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धरती को और ज्यादा गर्म होने से बचाने के लिए हो रहे जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में अंतिम मसौदा तैयार करने को लेकर पिछले दो हफ्तों से चली आ रही रस्साकसी आखिरकार खत्म हो गई है। ऐतिहासिक अंतिम मसौदा शनिवार को सम्मेलन में पेश कर दिया गया।
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मसौदे में ग्लोबल वॉर्मिंग को दो डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने और 2020 से इस समस्या से निपटने के लिए विकासशील देशों को हर साल 100 अरब डॉलर की मदद देने की प्रतिबद्धता जताई गई है। मसौदा तैयार करने पर अंतिम सहमति नहीं बन पाने की वजह से शुक्रवार को सम्मेलन को एक दिन के लिए और बढ़ा दिया गया था।

मसौदे में जीवनशैली और विकासशील देशों की मदद संबंधी भारत की चिंताओं का भी ख्याल रखा गया है। माना जा रहा है कि जल्द ही इस मसौदे पर सदस्य देश भी अपनी मंजूरी दे देंगे, जिससे यह मसौदा कानूनी तौर पर सदस्य देशों के लिए बाध्यकारी हो जाएगा। इस बीच, 134 विकासशील देशों वाले समूह समेत अमेरिका, चीन और सऊदी अरब ने जलवायु परिवर्तन पर प्रस्तावित मसौदे का स्वागत करते हुए उसे अपना समर्थन दे दिया है।
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फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेन फेबियस ने पेश किया

शनिवार को सम्मेलन में 195 देशों के प्रतिनिधियों के बीच ऐतिहासिक माने जा रहे ‘पेरिस समझौते’ के 31 पन्नों वाले अंतिम मसौदे को फ्रांस के विदेश मंत्री लॉरेन फेबियस ने पेश किया। इस दौरान फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद ने प्रतिनिधियों से इस पर मंजूरी दिए जाने की अपील भी की। इस मौके पर संयुक्त राष्ट्र के महासचिव बान की मून भी मौजूद थे। वहीं, सम्मेलन में हिस्सा ले रहे पर्यावरण मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने अंतिम मसौदे में भारत की चिंताओं का ध्यान रखने के लिए आभार जताया है।

उन्होंने कहा कि यह एक संतुलित मसौदा है, जो दुनिया को आगे लेकर जाएगा। माना जा रहा है कि भारत और चीन जैसे विकासशील देश 2 डिग्री सेल्सियस से नीचे के लक्ष्य और महत्वाकांक्षी 1.5 डिग्री सेल्सियस के लक्ष्य के पक्ष में नहीं हैं। ये देश लंबे समय के लिए कोयले से ईंधन हासिल करने की अनुमति चाहते हैं। वहीं फेबियस ने मसौदे को ‘निष्पक्ष, टिकाऊ और कानूनी रूप से बाध्यकारी’ करार दिया है।
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मसौदे पर मुहर लगना ऐतिहासिक मोड़ होगा

फेबियस ने कहा कि मसौदे में महत्वपूर्ण रूप से वित्तीय मदद का लक्ष्य 2025 तक किए जाने की बात भी शामिल है। अगर देश इस मसौदे पर अपनी मुहर लगा देते हैं तो ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती के लिए यह अंतिम समझौता होगा। उन्होंने कहा कि मसौदे पर मुहर लगना ऐतिहासिक मोड़ होगा। हमारा फोकस रेड लाइन नहीं, बल्कि ग्रीन लाइन है। वहीं, ओलांद ने कहा कि यह मसौदा महत्वाकांक्षी और व्यावहारिक है। सम्मेलन में मौजूद वैज्ञानिकों और प्रतिनिधियों ने उम्मीद जताई है कि जल्द ही यह मसौदा समझौते का रूप अख्तियार कर लेगा, जिससे धरती को और गर्म होने से बचाया जा सकेगा।

ओलांद ने मोदी को किया फोन
फ्रांसीसी राष्ट्रपति ओलांद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को जलवायु परिवर्तन वार्ता पर सक्रियता दिखाने के लिए उनकी तारीफ की है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने ट्वीट कर इस बात की जानकारी दी। ओलांद ने समझौते के लिए भारत को राजी करने के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को फोन भी किया। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने बताया कि ओलांद ने समझौते की ताजा स्थिति पर चर्चा की।

भारत है महत्वपूर्ण खिलाड़ी: टाइम
मशहूर पत्रिका टाइम ने जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत की भूमिका की तारीफ करते हुए कहा है कि भारत पेरिस समझौते को वजूद में लाने के लिए भरसक कोशिश कर रहा है। वह इस सम्मेलन में महत्वपूर्ण खिलाड़ी की भूमिका में है। पत्रिका ने कहा है कि भारत से आने वाले वार्ताकार सम्मेलन में रचनात्मक भूमिका निभा रहे हैं और अपनी मांगों को मनवाने के लिए दबाव भी डाल रहे हैं। सम्मेलन को किसी ठोस नतीजे पर पहुंचने के लिए भारत सक्रिय भूमिका निभा रहा है। यहां तक कि अंतिम मसौदे को तैयार करने में भी उसकी खासी भूमिका रही है।
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