फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

नर्स की मौत: ब्रितानी सरकार पर संगीन आरोप

Thu, 13 Dec 2012 09:21 PM IST
बीबीसी हिंदी/सलमान रावी
विज्ञापन
विज्ञापन
अरब सागर से किनारे स्थित भारत के पश्चिमी तट के इस इलाके में क्रिसमस के कारण दिसंबर महीने की शुरुआत से ही जश्न जैसा माहौल रहता है। लेकिन इस बार सिर्फ मातम है।
विज्ञापन


यहां क्रिसमस की तैयारियों पर पानी फिर चुका है क्योंकि कर्नाटक के इस सुदूर इलाके में अब शोक सभाएं आयोजित हो रही हैं।

यहां लंदन में शाही परिवार से जुड़ी फर्जी फॉन कॉल के बाद मृत पाई गईं भारतीय मूल की नर्स जैसिंथा सल्दान्हा को याद किया जा रहा है। कहीं ग़म है तो कहीं आक्रोश।

जैसिंथा की आत्महत्या की बात यहां के लोगों के गले के नीचे नहीं उतर रही है। मंगलौर और इसके निकटवर्ती तटीय शहर उडूपी में ग़म और गुस्सा है। उधर लंदन में इस मामले की शुरुआती जांच में पता चला है कि जैसिंथा लटकी हुई पाई गईं थी।
विज्ञापन


ब्रितानी प्रधानमंत्री डेविड कैमरन ने बुधवार को हाउस ऑफ कॉमन्स में जैसिंथा को श्रद्धांजलि दी। जैसिंथा शादीशुदा थीं और उनके दो बच्चे हैं।

मीडिया से नाराजगी
उडूपी के खामोश कस्बे शिरवा में जैसिंथा का ससुराल है जहां दिन और रात मीडियाकर्मियों की भीड़ लगी रहती है। वे परिवार के लोगों से बात करना चाहते है। मगर जैसिंथा के पति का परिवार मीडिया से ख़ासा नाराज़ है। इस नाराज़गी की वजह का पता नहीं चल पाई क्योंकि परिवार का कोई भी सदस्य बात नहीं करना चाहता।

परिवार के करीबी मित्रों से बात करने पर पता चलता है कि गुस्सा ब्रितानी मीडिया पर ज्यादा है। परिवार के कुछ मित्रों का कहना है की शुरू में ब्रितानी मीडिया नें मामले पर जो रुख अपनाया उससे परिवार को काफी दुख पहुंचा है।

इस परिवार ने न सिर्फ अपने दरवाजों को मीडिया के लिए बंद कर दिया है बल्कि कुछ एक पत्रकारों का कहना है की उन पर कुत्ते को भी छोड़ा गया है।

शिरवा के इस गांव में जमघट है। चाहे वो नेता हों या मीडियाकर्मी। मगर राजनीतिक दलों के लोगों के प्रति जैसिंथा के पति के परिवार के लोगों का रुख उतना ख़राब नहीं है। राजनितिक दलों के नेता और कार्यकर्ता बिना रोक टोक आ जा रहे हैं।

बुधवार को जैसिंथा के घर पर मेरी मुलाक़ात कांग्रेस के नेता ऑस्कर फ़र्नांडीस से हुई। उन्होंने बताया कि परिवार के लोग चाहते हैं कि मीडिया वाले उन्हें अकेला छोड़ दें। बीबीसी से बातचीत में उन्होंने कहा: "परिवार के लोग सदमे में हैं। वो चाहते हैं कि मीडिया वाले उन्हें अकेला छोड़ दें।"

सरकार पर आरोप
पिछले दिनों लंदन के अस्पताल में ऑस्ट्रेलिया के एक रेडियो स्टेशन के दो प्रस्तोताओं ने फोन कर खुद को महारानी और प्रिंस चार्ल्स बताया और 'डचेज ऑफ कैम्ब्रिज' केट का हाल जानना चाहा जो वहां इलाज करा रही थीं।

ये फोन जैसिंथा ने ही उठाया और उसे दूसरी नर्स को बढ़ा दिया जो डचेज की देखभाल कर रही थीं। उन्होंने उनकी तबीयत के बारे में सारी जानकारी ऑस्ट्रेलियाई स्टेशन को दे दी। इसके दो दिन बाद जैसिंथा मृत पाई गईं।

मंगलौर में भी लोगों के जज़्बात भड़के हुए हैं। यहीं के वालेंसिया इलाके में जैसिंथा का जन्म हुआ था और उन्होंने अपनी ज़िन्दगी का बड़ा हिस्सा यहां बिताया है। यहां पर अब उनकी माँ और भाई रहते हैं। यहां बुधवार को जैसिंथा की याद में एक बड़ा कैंडल लाईट जुलूस निकाला गया।

इस जुलूस को स्थानीय रोमन कैथलिक चर्च ने आयोजित किया था जिसमें जैसिंथा के परिवार के करीबी मित्रों के अलावा आम लोग भी शामिल हुए।

इस जुलूस में शामिल पूर्व विधायक और जैसिंथा के पारिवारिक मित्र इवान डिसोउज़ा नें बीबीसी से बातचीत में आरोप लगाया कि अगर जैसिंथा ने वाकई आत्महत्या की होगी तो ब्रितानी सरकार की प्रताड़ना से क्षुब्ध होकर की होगी।

आत्महत्या पर ‘विश्वास नहीं’
वो कहते हैं: "हमें पता चला है कि फ़ोन काल के बाद जैसिंथा को लन्दन में अधिकारियों नें प्रताड़ित किया है। इस लिए हम मामले की जान की मांग कर रहे हैं।"

इस सभा में मौजूद जैसिंथा की बचपन की दोस्त विक्टोरिया मेबेल भी कहती हैं कि वो ये मान ही नहीं सकतीं कि जैसिंथा जैसी मज़बूत इरादों वाली महिला आत्महत्या भी कर सकती है।

वो कहती है: "मैं उसे बचपन से जानती हूं। हम साथ साथ पढ़ा करते थे। वो आत्महत्या करने वालों में से हैं ही नहीं। इस मामले में कुछ तो गड़बड़ है।"

अब कर्नाटक के इस तटवर्तीय इलाके में लोगों को इंतज़ार है जैसिंथा के शव का। स्थानीय चर्च के प्रमुख फादर मैक्सिम रोजारियो नें भारत सरकार से अपील की है कि वो जैसिंथा के शव को वापस लाने में उनके परिवार के लोगों की मदद करे।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें