बता दें स्वीडिश अकादमी इस वक्त आलोचनाओं का सामना कर रही है। संस्था की एक पूर्व सदस्य के पति फ्रांसीसी फोटोग्राफर ज्यां क्लाउड अर्नाल्ट पर कथित तौर पर यौन दुराचार का आरोप लगा था।
यह पुरस्कार साल 1901 से दिए जा रहे हैं, लेकिन ये मामला अभी तक का सबसे बड़ा मामला है। जहां अकादमी के कुछ लोगों का कहना है कि परंपरा को बनाए रखने के लिए ये पुरस्कार दिए जाने चाहिए तो वहीं कुछ सदस्य ऐसे भी हैं जिनका कहना है कि संस्था उस स्थिति में नहीं है कि वह पुरस्कार दे पाए। बता दें पिछले साल नवंबर में #मीटू कैंपेन से प्रेरित होकर 18 महिलाओं ने अर्नाल्ट के खिलाफ यौन उत्पीड़न का आरोप लगाया था। इन सभी आरोपों से अर्नाल्ट ने साफ तौर पर इंकार कर दिया था।
इसके बाद उसकी पत्नी लेखिका कटरीना प्रोसटेंशन को संस्था ने निकाले जाने के खिलाफ वोट किया था। जिसके बाद ऐसी खबरें भी आईं कि लाभ के पद पर रहते हुए कुछ सदस्यों ने नोबेल पुरस्कार के विजेताओं का नाम लीक किया है। इन्हीं सब कारणों से अकादमी के प्रति लोगों के विश्वास में भी कमी आई है।