अपने जीवन की चुनौतियों के बारे में बताते हुए ब्रैनसन ने कहा कि कोशिश करने से आप हारते कभी नहीं, या तो जीतते हैं या फिर सीखते हैं। उन्होंने कहा कि 'अपनी जिंदगी के किसी भी पड़ाव पर मैंने ये कभी नहीं सोचा था कि मैं इस मुकाम तक पहुंच पाऊंगा। स्कूल के दिनों में मैं सबसे कमजोर छात्र हुआ करता था। मेरे साथी छात्र और शिक्षक मुझे सबसे बेवकूफ लड़का मानते थे।'
उन्होंने अपनी बीमारी का जिक्र करते हुए कहा कि 'मुझे डिसलेक्सिया बीमारी थी। इस बीमारी से पीड़ित बच्चों को पढ़ने और ध्यान केंद्रित करने में परेशानी होती है। ऐसे हालात में मैं कभी नहीं सोच सकता था कि मैं अपने साथियों से ज्यादा सफल हो पाऊंगा। लेकिन मेरी यह कमजोरी ही मेरी ताकत बनी।'
ब्रैनसन ने अपनी बीमारी के बारे में बात करते हुए कहा कि 'मुझे पता चला कि डिसलेक्सिया से पीड़ित लोग उन कामों में ज्यादा अच्छे होते हैं, जो उनके जुनून और प्यार से जुड़े हों। जो उन पर थोपा ना जाए।' ब्रैनसन के मुताबिक उन्होंने अपनी इसी ताकत को तराशने का निर्णय लिया।
इसके बाद उन्होंने महज 15 साल की उम्र में ही स्कूल से ड्रॉपआउट ले लिया। फिर मैग्जीन निकालना शुरु किया। उन्होंने मैग्जीन के कंटेंट और उससे संबंधित रिकॉर्डस को ऑनलाइन अपडेट करने की कोशिश भी की लेकिन मैग्जीन फ्लॉप हो गई।
उन्होंने बताया कि उनकी इसी असफलता से उन्हें सफलता का रास्ता दिखाई दिया। उन्हें इसी से ऑनलाइन बिजनेस करने का आइडिया मिला। जिसके बाद वर्जिन ग्रुप की नींव पड़ी। उन्होंने बताया कि बिजनेस में भी कई लोगों ने उन्हें सहयोग करने से इंकार कर दिया था। लेकिन इसके बावजूद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और अकेले बिजनेस शुरु करने की ठान ली।
ब्रैनसन ने कहा कि उनके साथियों ने ये कभी नहीं सोचा था कि वह बिजनेस में कभी टिक भी पाएंगे। लेकिन उनके जुनून ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाया। उन्होंने कहा कि अपनी जिंदगी के पूरे किस्से से वह समझाना चाहते हैं कि ये कभी ना समझें कि असफलता बुरी चीज है। असफलता तो बहुत प्यारी चीज है।
उन्होंने कहा कि रिस्क लीजिए, असफल होइए। इस प्रक्रिया में कई बार मुश्किलों का अनुभव होगा। लेकिन एक कोशिश तो करनी ही चाहिए। उन्होंने कहा कि कोशिश करते हुए आप कभी हारते नहीं हैं या तो जीतते हैं या फिर सीखते हैं।