भारत और रूस ने बृहस्पतिवार को बहुप्रतीक्षित कुडनकुलम परमाणु ऊर्जा संयंत्र की अंतिम दो इकाइयों पर समझौते को अंतिम रूप दे दिया। दोनों देश में रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए सहमति बनी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों के बीच पांच समझौतों पर मुहर लगी।
भारत के लिए यह समझौता काफी अहम माना जा रहा है। तमिलनाडु के कुडनकुलम न्यूक्लियर प्लांट की यूनिट 5 और 6 का निर्माण करने में रूस मदद देगा। इनसे 1000 मेगावाट परमाणु बिजली पैदा होगी।
समझौते पर खुशी जताते हुए मोदी ने कहा कि इससे भारत-रूस संबंध और मजबूत होंगे। रिएक्टरों का निर्माण भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम लिमिटेड (एनपीसीआईएल) और रूस के परमाणु संस्थानों की नियामक इकाई रोसाटॉम की सहायक कंपनी एटमस्ट्रॉयएक्सपोर्ट करेंगे। दोनों इकाइयों की उत्पादन क्षमता एक-एक हजार मेगावाट है। भारत में सभी 22 परमाणु ऊर्जा रिएक्टरों की मौजूदा बिजली उत्पादन क्षमता 6780 मेगावाट है।
हाई स्पीड ट्रेन चलेगी
नागपुर-सिकंदराबाद के बीच हाई स्पीड ट्रेन के लिए भारत और रूस ने एक एमओयू पर दस्तखत किए।
सेना के तीनों अंग साथ में करेंगे ‘इंद्र’ अभ्यास
भारत और रूस अपनी सेनाओं के तीनों अंगों का अभ्यास इस साल के अंत में करेंगे। इस अभ्यास को ‘इंद्र-2017’ नाम दिया गया है। इस तरह का यह पहला अभ्यास होगा। इसके साथ ही दोनों देशों ने प्रमुख सैन्य साजो सामान और उपकरणों के संयुक्त उत्पादन, विकास के जरिए द्विपक्षीय रक्षा सहयोग को बढ़ाने का फैसला किया। दोनों ने मिलकर कामोव-226 हेलीकॉप्टरों का संयुक्त रूप से उत्पादन करने का भी फैसला किया है।
दोनों देश मिलकर बनाएंगे स्वतंत्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी
ऊर्जा सेतु बनेगा
‘21वीं सदी के लिए विजन’ शीर्षक वाले दस्तावेज में कहा गया है कि भारत और रूस की अर्थव्यवस्थाएं ऊर्जा के क्षेत्र में एक-दूसरे की पूरक हैं और दोनों देश एक ऊर्जा सेतु बनाने की दिशा में काम करेंगे।
इसमें कहा गया है कि परमाणु ऊर्जा, परमाणु ईंधन चक्र और परमाणु विज्ञान और प्रौद्योगिकी समेत व्यापक परिप्रेक्ष्य में भारत-रूस सहयोग का भविष्य उज्ज्वल है। ऊर्जा सहयोग के क्षेत्र में परमाणु, हाइड्रोकार्बन, पनबिजली व नवीकरणीय स्रोत शामिल होंगे। इसके साथ ही दोनों देशों ने रूस के आर्कटिक क्षेत्र में हाइड्रोकार्बन की उत्खनन व खनन की संयुक्त परियोजनाएं शुरू करने पर भी सहमति जताई।
दोनों देश मिलकर बनाएंगे स्वतंत्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी
भारत और रूस ने मिलकर स्वतंत्र क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के विकास का संकल्प जताया है। भारतीय प्रधानमंत्री मोदी और रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने संयुक्त घोषणापत्र में कहा कि वे क्रेडिट रेटिंग एजेंसी के संदर्भ में दोनों देशों में संबंधित कानून के बीच तालमेल की संभावना तलाशेंगे।
दोनों नेताओं ने यह संकल्प ऐसे समय जताया है जब वैश्विक रेटिंग एजेंसियों के अमेरिका और चीन जैसी बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के प्रति झुकाव देखा जा रहा है। वैश्विक स्तर पर कुछ ही रेटिंग एजेंसियां हैं और उनमें भी ज्यादातर अमेरिका की हैं। फिच, स्टैंडर्ड एंड पूअर्स और मूडीज समेत कई एजेंसियां भारत को निवेश के सबसे निम्न स्तर की रेटिंग दे रही हैं।
निवेश बढ़ाने पर भी चर्चा हुई
व्यापार के संदर्भ में मोदी ने कहा कि दोनों देश 2025 तक 30 अरब डॉलर के लक्ष्य को प्राप्त करने के करीब हैं। फिलहाल दोनों देशों के बीच 7.8 अरब डॉलर का व्यापार होता है, जो 2014 में 10 अरब डॉलर के स्तर पर था और अब कम हो गया है। पुतिन ने कहा कि भारत में रूसी निवेश चार अरब डॉलर का है, वहीं रूस में भारतीय निवेश 8 अरब डॉलर का है।