सोमवार को नाटो के चीफ ने कहा कि हम रूस के साथ शीत युद्ध नहीं चाहते। सेक्रेटरी जनरल जींस स्टोलटेनबर्ग ने रोमानियन कैपिटल में नाटो पार्लियामेंट्री असेंबली के आखिरी दिन यह बातें कहीं। उन्होंने कहा कि हम रूस की अपारदर्शी नीति के कारण परेशान हैं।
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जींस ने कहा कि सितंबर में हुए रसियन बेलारूस ऑपरेशन में हजारों सेना के जवान, टैंकों और विमानों को शामिल किया गया था। इस ड्रिल में हथियारों का इस्तेमाल करने के लिए तैयार किया गया युद्धाभ्यास शामिल है।
जींस ने यह भी कहा कि रूस हमारा पड़ोसी देश है। हम उसे अलग नहीं करना चाहते और न ही शीत युद्ध चाहते हैं। उन्होंने बताया कि जब रूस ने उकराइन में आक्रामक कार्रवाई की थी तब 29 सदस्यों के गठबंधन ने जेट पेट्रोलिंग बढ़ायी थी।
नाटो ने यह भी बताया कि 2014 में मिशन खत्म होने के बाद तालिबान ने देश के कुछ हिस्सों में अपना नियंत्रण बढ़ाया था। लेकिन हम वहां कई सालों तक रहे हैं और हमने कई चीजें हासिल की
हैं। अब अंतरराष्ट्रीय आतंकियों के लिए सुरक्षित स्वर्ग नहीं बचा है। हम अफगानिस्तान में लोगों को बचाने के लिए हैं।
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आपको बता दें कि नाटो संधि के आधार पर बना एक सैन्य संगठन है जिसके सदस्य 28 देश हैं। इसका मुख्यालय ब्रुसेल्स (बेल्जियम) में है। सदस्य देशों पर हमले की स्थिति में नाटो किसी भी बाहरी शक्ति से लड़ने का अधिकार रखता है। अमेरिका, फ्रांस और यूनाइटेड किंगडम इसके मुख्य सदस्य हैं।