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क्या माता-पिता ही सिखाते हैं झूठ बोलना?

Thu, 24 Jan 2013 12:34 PM IST
बीबीसी हिंदी
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क्या हम में से ज्यादातर माता-पिता अपने बच्चों से झूठ बोलते हैं? उनके इर्द-गिर्द झूठ का संसार रचते हैं?
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एक सर्वेक्षण में ये बातें सामने आई है कि ब्रिटेन और चीन में माता-पिता अपने बच्चों से हर छोटी-बड़ी बात पर झूठ बोलते हैं। इस तरह की झूठ में बहानेबाजी और टालमटोल शामिल है। यानी वे अपने बच्चों को सही-सही नहीं बताते हैं।

उदाहरण के तौर पर ब्रिटेन और चीन में ये आम बात है कि वो अपने बच्चे से ये कह दे कि ‘हम खिलौने बाद में ले आएंगे।’ वैसे सर्वेक्षण में भारत की बात तो नहीं है लेकिन यहां भी माता-पिता को अक्सर इस तरह की बातें करते सुना जा सकता है।
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झूठ की रणनीति
तकरीबन 200 परिवारों से बातचीत पर आधारित इस सर्वेक्षण में ये बातें सामने आई हैं कि माता-पिता बड़ी सोची समझी रणनीति के तहत झूठ बोलते हैं। बच्चों के व्यवहार पर फौरन लगाम लगाने के लिए अक्सर इस तरह के वक्तव्यों का इस्तेमाल किया जाया है जो एक कोरा झूठ होता है।

सर्वेक्षण में कुछ बेहद आम धमकी का जिक्र किया गया है जिसमें बच्चे को अकेला छोड़ने की धमकी से लेकर उसके पालतू जानवर को चाचा के घर छोड़ आने की बात कही गई है।

चीन और ब्रिटेन के माता-पिता अक्सर अपने बच्चों से इस तरह की झूठी बातें करते हैं ताकि वो बच्चों को नियंत्रित कर सके। इस अध्ययन से प्राप्त हुई जानकारी को अंतराष्ट्रीय मनोवैज्ञानिक पत्रिका में प्रमुखता से छापा गया है।

‘हम इसे बाद में लेंगे'
ये एक बेहद आम झूठ है जो अक्सर माता पिता अपने बच्चों से कहते हैं। इस तरह की बातें ना सिर्फ ब्रिटेन और चीन में बल्कि अमेरिका में भी की जाती हैं।

बच्चों को घर में छोड़ देने की धमकी या उस जगह पर छोड़ने की धमकी जहां बच्चे को जाने का बिल्कुल मन ना हो ये दूसरा सबसे बड़ा झूठ है जो आम तौर पर बोला जाता है। बच्चों की खाने पीने की आदतों को लेकर ये कहना भी आम बात है कि ब्रोकली (हरी गोभी) खाने से तुम लंबे होओगे।

इस सर्वेक्षण में एक झूठ जो संरक्षित की गई उसकी बानगी देखिए, “अगर तुमने मेरी बात नहीं मानी तो मेरे जाने के बाद अपहरणकर्ता आएंगे और तुम्हें ले जाएंगे।”

"अगर तुम सीधे नहीं हुए तो मैं पुलिस को बुला दूंगी।", "अगर तुमने इसे नहीं छोड़ा तो वो आंटी नाराज हो जाएंगी।"

इस सर्वेक्षण में कई बड़े और नामचीन विश्वविद्यालयों के मनोवैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। जिनमें कैलिफोर्निया के सैन डियागो विश्वविद्यालय, चीन के शिन्हुआ विश्व विद्यालय, कनाडा के टोरंटो विश्व विद्यालय के मनोवैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया।

हालांकि इसके बादवजूद भी वैज्ञानिकों को माता और पिता के झूठ का अंतर स्पष्ट नहीं हो पाया कि आखिर पिता और माता अपने बच्चों से बात करते वक्त किस तरह का झूठ बोलते हैं या उसमें क्या समानता होती है।
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मनोवैज्ञानिकों ने इस तरह के झूठ को ‘इंस्ट्रूमेंटल लायिंग’ करार दिया है और साथ ही ये सवाल भी उठाया है कि क्या माता-पिता के इस किस्म के झूठ को कभी भी न्यायपूर्ण करार दिया जा सकता है?

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