महात्मा गांधी का आखिरी वसीयतनामा एक नीलामी में 55 हज़ार ब्रितानी पाउंड यानी लगभग 46,24,662 रुपए में बिका है।
दो पन्नों में गुजराती में लिखी वसीयत के अलावा गांधी जी के खून का नमूना और उनकी चप्पलों समेत उनके 50 स्मृति चिन्ह नीलामी में शामिल थे।
वसीयत पर गांधी जी के गुजराती में हस्ताक्षर थे और इसकी कीमत 30 हज़ार से 40 हज़ार पाउंड के बीच आंकी गई थी।
ब्रिटेन के श्रॉपशर शहर के लडलो रेसकोर्स में हुई इस नीलामी में गांधी जी की चप्पलें 19 हज़ार पाउंड में बिकीं जो कि तय कीमत से नौ हज़ार पाउंड ज़्यादा थीं।
नहीं बिका खून का नमूना
नीलामी घर मलॉक्स का कहना था कि 1920 के दशक में अपेंडिक्स के ऑपरेशन के बाद गांधी जी ने एक मित्र को कांच की स्लाइड पर जो खून का नमूना दिया था, नीलामी में उसे किसी ने नहीं खरीदा।
इसके अलावा 1932 का एक "दुर्लभ ब्रितानी संसद का दस्तावेज़ जिसमें गांधी जी को आंतकवादी घोषित किया गया था", वो 260 पाउंड में बिका। इस दस्तावेज़ की कीमत 200 से 300 पाउंड के बीच तय की गई थी।
महात्मा गांधी और ब्रिटेन के सम्राट जॉर्ज पंचम के हाथ मिलाने की एक तस्वीर केवल 25 पाउंड में ही बिकी।
नीलामी के सामान में महात्मा गांधी का बिछौना और पूजा की माला भी शामिल थे।
नीलामी घर मलॉक्स के एक प्रवक्ता का कहना था कि वे नीलामी से "बेहद खुश" थे। हालांकि नीलामी के दौरान लडलो रेसकोर्स में बोली लगाने वाले लगभग 30 लोग ही मौजूद थे लेकिन असलियत में दुनिया भर में दर्जनों लोगों ने इंटरनेट पर नीलामी की सीधा प्रसारण देखा और बोली लगाई।
पिछले साल एक नीलामी में गांधी जी का चश्मा 34 हज़ार पाउंड में बिका था।
पिछले एक दशक में दुनिया भर में महात्मा गांधी के स्मृति चिन्हों की नीलामी में भारत सरकार की मांग रही है कि नीलामी में मना करने का पहला हक़ उसे मिलना चाहिए क्योंकि गांधी जी से जुड़ी चीज़ें भारत की राष्ट्रीय धरोहर हैं।