यूरोप समर्थक मध्यमार्गी इमैनुएल मैक्रों फ्रांस के सबसे कम उम्र के राष्ट्रपति बनने जा रहे हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक वे प्रेसिडेंसियल इनोग्रेशन प्रोग्राम में पहुंच गए हैं। बता दें कि मैक्रों को कोई बड़ा राजनीतिक अनुभव नहीं है लेकिन उन्होंने अपनी प्रतिद्वंदी नेता मरीन ले पेन को राष्ट्रपति चुनाव में कड़ी शिकस्त दी।
फ्रांस के राजनीतिक इतिहास में ऐसा पहली बार हो रहा है कि देश को ऐसा राष्ट्रपति मिल रहा है जो दो प्रमुख पार्टियों सोशलिस्ट और रिपब्लिकन से नहीं है। मैक्रों मौजूदा राष्ट्रपति फ्रांकोइस होलांदे की जगह लेंगे। केंद्रीय पेरिस के एलिसी पैलेस में इस शपथ ग्रहण समारोह का आयोजन किया गया है।
मैक्रों और होलांदे राष्ट्रपति कार्यालय में एक निजी बैठक करेंगे, जिसमें होलांदे मैक्रों को फ्रांस के परमाणु हथियारों के कोड्स सौंपेंगे। बता दें कि अमेरिका की तरह, यहां कोई बड़ा शपथ ग्रहण समारोह नहीं होता है। इस जीत के साथ ही 39 वर्षीय पूर्व बैंकर मैक्रों ने अपने चुनाव प्रचार में वादा किया था कि वह देश की बिगड़ी हुई अर्थव्यवस्था को दुरुस्त करेंगे।
आंकड़े बताते हैं कि मैक्रों ने 65.5 फीसदी से 66.1 फीसदी बैलट समर्थन से जीत दर्ज की है जबकि ली पेन को 33.9 फीसदी से 34.5 फीसदी का बैलट समर्थन ही मिल पाया। तीन साल पहले तक कोई नहीं जानता था कि मैक्रों यूरोप के सबसे शक्तिशाली नेताओं में से एक हो जाएंगे।