जिहाद के नाम पर इराक और सीरिया गईं ब्रिटिश जेहादियों की पत्नियों की जिंदगी नर्क बनकर रह गई है। वो या तो विधवा होकर वापस ब्रिटेन लौट रही हैं या इस्लामिक स्टेट ग्रुप की क्रूरता का शिकार हो रही हैं। अभी तक 10 ब्रिटिश महिलाएं और उनके बच्चे इस्लामिक स्टेट यानी कैलीफेट को छोड़ चुके हैं।
आतंक निरोधी सोर्स से जुड़े लोग, संस्थान तथा जिहादी की पूर्व पत्नियों ने यह जानकारी दी है। इराक और लेवांट में इस्लामिक स्टेट ने कुछ पाबंदियां लगा रखी हैं। नतीजन कुछ और विदेशी महिलाएं यहां से भागने को तैयार हैं। पुलिस और होम मिनिस्ट्री के अधिकारियों की मानें तो और अधिक महिलाएं निकट भविष्य में भाग सकती हैं।
हाल ही में 50 से अधिक ब्रिटिश महिलाएं इराक और सीरिया गईं थीं। इनमें से कुछ अपने पतियों और बच्चों के साथ तो कुछ अकेले गईं। अकेले गईं महिलाओं को इस्लामिक स्टेट के सोशल मीडिया से जुड़े लोगों ने भी लुभावनी पेशकश कर इराक और सीरिया में आने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि जिहादियों की पत्नियों का जीवन रोमांस और साहस से भरा रहता है।
इस्लामिक स्टेट के लड़ाकू सैनिक इराक, कुरदिश और सीरिया के प्रतिद्वंदी गुटों के हमले के बाद अपनी जमीन गंवा चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय हवाई हमले से भी यह संभव हो पाया है। इसके बाद इस्लामिक स्टेट के कमजोर पड़ने से वहां जीवन अब आसान नहीं रहा।
इस्लामिक स्टेट से अलग होकर प्रतिद्वंदी गुट वाले इलाके उत्तरी सीरिया में रह रही जर्मनी की एक महिला ने बताया कि साल की शुरुआत से अब तक करीब 30 से 35 महिलाएं आतंकवाद छोड़ चुकी हैं। काफी सारी महिलाएं इस्लामिक स्टेट के इलाके से भागकर टर्की आदि में प्रवेश करने की कोशिश की। इसमें ब्रिटेन की 5 से 10 महिलाएं शामिल हैं।